महराजगंज के फरेन्दा क्षेत्र में जंगल किनारे बसे किसान जंगली जानवरों से अपनी फसलों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। रात के समय नीलगाय, सांभर और जंगली सूअरों के झुंड खेतों में घुसकर पक चुकी गेहूं की फसल को रौंद रहे हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसान सीताराम चौधरी, रामाशंकर यादव, जितेंद्र कुमार और बैजनाथ ने बताया कि दिनभर की मेहनत के बावजूद रात में जानवर उनकी फसलें तबाह कर देते हैं। उन्होंने कहा कि गेहूं की कटाई का समय है, लेकिन अब तक 30-40 प्रतिशत फसल बर्बाद हो चुकी है। किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जिससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसानों ने खेतों के चारों ओर बाड़ लगाने का प्रयास किया है, लेकिन यह पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि जंगल से सटे खेतों में रातभर पहरा देना भी मुश्किल है। जितेंद्र कुमार ने बताया कि पिछले साल भी यही समस्या थी, लेकिन वन विभाग या प्रशासन से कोई स्थायी समाधान नहीं मिला। बैजनाथ ने ड्रोन निगरानी या इलेक्ट्रिक फेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को लागू करने की मांग की है। वन विभाग के एक अधिकारी ने स्वीकार किया कि जंगली जानवरों की समस्या पूरे महराजगंज जिले में है। उन्होंने बताया कि विभाग ट्रैप कैमरे लगाने और जानवरों को भगाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन जंगल के अधिक घनत्व के कारण यह एक चुनौती है। जिलाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस मुद्दे पर जल्द ही एक बैठक बुलाई जाएगी। स्थानीय किसान संगठनों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर फसल सुरक्षा के लिए तत्काल बाड़बंदी, प्रभावी निगरानी और नुकसान के लिए मुआवजे की व्यवस्था करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि फसल बीमा का लाभ मिलने के बावजूद बार-बार के नुकसान से उनका कर्ज बढ़ता जा रहा है। यह समस्या केवल फरेन्दा तक सीमित नहीं है, बल्कि महराजगंज के जंगल से सटे सभी इलाकों में व्याप्त है।
फरेन्दा में जंगली जानवर से गेहूं की फसल बर्बाद:किसानों ने सरकार से की मुआवजे की मांग, नहीं मिला स्थायी समाधान
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