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नौसेना की नई पनडुब्बी INS तारागिरी खास क्यों है? ताकत से जरूरत तक, सब समझिए

भारतीय नौसेना अब आत्मनिर्भरता की तरफ तेजी से बढ़ गई है। नौसेना को INS तारागिरी का नाम चर्चा में है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने INS तारागिरी से जुड़े इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया है। यह जहाज इंडियन नेवी की ताकत दोगुनी बढ़ा देगा। यह भारत का तीसरा ऐसा जहाज है, जिसके निर्माण में प्रयोग की गई 70 प्रतिशत सामग्री स्वदेशी है। रक्षा मंत्री ने बताया है कि INS तारागिरी को 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम को सौंप दिया गया है। यह जहाज बेहद शक्तिशाली है, जिसकी वजह से दुश्मन के लिए हमला करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जाएगा।

INS तारागिरी, प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित फ्रिगेट्स की श्रृंखला का हिस्सा है, जिसे भारतीय नौसेना के बेड़े को आधुनिक और अधिक सक्षम बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इस परियोजना के तहत बनाए जा रहे सभी युद्धपोतों में अत्याधुनिक डिजाइन, बेहतर सर्विलांस सिस्टम और मल्टी-रोल क्षमताएं शामिल हैं, जिससे यह जहाज कई प्रकार के खतरों से एक साथ निपटने में सक्षम हैं। अब सवाल उठता है कि INS तारागिरी जहाज की ताकत क्या है।

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INS तारागिरी क्यों है ताकतवर?

INS तारागिरी एक स्वदेशी लड़ाकू जहाज है। इस जहाज के निर्माण में एडवांस तकनीक का उपयोग किया गया है। इसमें 12.7 mm और 30 mm क्लोज-इन वेपन सिस्टम लगाए गए हैं। इस जहाज में ऑपरेशन के दौरान इस्तेमाल करने के लिए टॉरपीडो और रॉकेट भी लगाए गए हैं। INS तारागिरी में प्रोजेक्ट 17A की स्टील्थ तकनीक है, जिसके जरिए यह दुश्मनों की नजर में आए बिना हमला कर सकता है।

तारागिरी जहाज का वजन 6670 टन है। इसकी लंबाई 149 मीटर है और यह लगभग 52 किमी/घंटा की गति से चल सकता है। इसमें दो गैस टर्बाइन और दो डीजल इंजन लगे हैं, जो इसे लंबे समय तक संचालन की क्षमता देते हैं।

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तारागिरी पनडुब्बी अलग कैसे है?

इस जहाज में कई ऐसे फीचर्स हैं, जो इसे बाकी जहाजों से अलग बनाते हैं। INS तारागिरी में सोनार-एब्जॉर्बिंग कोटिंग दी गई है, जो जहाज के चलने से होने वाली आवाज को कम करती है। जहाज का शोर कम होने से दुश्मन सेना के लिए इसकी लोकेशन पता लगाना मुश्किल हो जाता है। इस जहाज में लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल सिस्टम भी है, जो दुश्मन को दूर से ही निशाना बना सकती है। यही तकनीक इस जहाज को और अधिक शक्तिशाली बनाती है।

INS तारागिरी जैसे जहाज भारत की समुद्री सीमाओं की रक्षा, निगरानी और जरूरत पड़ने पर जवाबी कार्रवाई करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसकी तैनाती से भारतीय नौसेना की ताकत और प्रभाव दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

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