UP: आकाश आनंद को मायावती ने घोषित किया अपना उत्तराधिकारी, फैसले से गदगद अखिलेश यादव, बोले- हमें खुशी है, लेकिन…

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भतीजे आकाश आनंद (Akash Anand) को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने बड़ा दांव चला है। वहीं, आकाश आनंद को उत्तराधिकारी बनाए जाने के बाद विभिन्न दलों के नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने मायावती के इस फैसले पर खुशी जाहिर की है। सपा चीफ ने कहा कि बसपा ने इस तरह का निर्णय लिया है तो हमें खुशी है।

उम्मीद है भाजपा से दूरी बनाए रखी जाएगी
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि हमें उम्मीद है कि नए नेतृत्व के साथ भाजपा से दूरी बनाए रखी जाएगी। वहीं, इस दौरान तीन राज्यों में बीजेपी द्वारा मुख्यमंत्री के ऐलान में देरी पर उन्होंने कहा कि ये कोई बड़ा सवाल नहीं है, जब उन्हें बहुमत मिल गया है और जनता ने उन्हें मौका दिया है तो आज नहीं कल मुख्यमंत्री बन ही जाएगा। ये कोई बड़ा सवाल नहीं है।

आकाश आनंद मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। 1995 में जन्मे आकाश ने लंदन से मास्टर्स इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है। पिछले छह वर्षों से राजनीति में सक्रिय आकाश बसपा के मंचों और पार्टी की बैठकों में मायावती के साथ दिखते रहे हैं। आकाश आनंद को 2017 के चुनाव में मायावती के साथ सहारनपुर में देखा गया था। इससे पहले मायावती परिवार से कोई भी सदस्य रैली और चुनावी जनसभाओं में नहीं दिखाई दिया था।

इससे लोगों में चर्चाएं थीं कि मायावती पार्टी उत्तराधिकारी परिवार से चुनेंगी या पार्टी से ही किसी को मौका देंगी। 2017 के बाद से आकाश आनंद का बसपा में कद बढ़ता चला गया। बसपा की बैठकों में आकाश आनंद देखे जाने लगे। मायावती ने हाल ही में संपन्न हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत मिजोरम की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि, बसपा हिंदी पट्टी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई।

वहीं, भाजपा नेता राकेश त्रिपाठी ने बसपा सुप्रीमो के इस कदम को परिवारवादी बताया और कहा कि उत्तराधिकार तो राजवंशों और मुगलिया काल में होता था। उत्तराधिकार परिवार में होता है राजनीतिक दल में नहीं होता है। राजनीतिक दल जनता से बनते हैं, कार्यकर्ताओं से बनते हैं। पार्टी का अध्यक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुना जाता है किसी उत्तराधिकार से नहीं। ये राजवंशों में होता था। मुगलिया सल्तनत में होता था, लेकिन बहुजन समाज पार्टी जो मान्यवर कांशीराम ने मिशन के रूप में शुरू की थी वो अब कमीशन में बदल गई और अब पूरी तरह से परिवारवाद में डूब गई है।