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60 किमी पैदल चला शिवभक्त, कंधे पर 51 लीटर जल:श्रावस्ती में बाबा विभूति नाथ पर जलाभिषेक, बोला- भोलेनाथ पर पूरा भरोसा


भगवान शिव के प्रति आस्था और संकल्प की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। एक शिवभक्त अपनी मनोकामना पूरी होने की उम्मीद में 51 लीटर जल लेकर करीब 60 किलोमीटर पैदल बाबा विभूति नाथ मंदिर पहुंचा। लंबी दूरी की इस कठिन यात्रा के दौरान भक्त ने अपने संकल्प को नहीं छोड़ा। मंदिर पहुंचते ही उसने विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की। भक्त का कहना है कि उसे पूरा विश्वास है कि भगवान शिव उसकी तपस्या और श्रद्धा को जरूर स्वीकार करेंगे। 51 लीटर जल लेकर शुरू की कठिन यात्रा शिवभक्त ने भगवान शिव के प्रसिद्ध बाबा विभूति नाथ मंदिर में जलाभिषेक का संकल्प लिया था। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए वह 51 लीटर जल लेकर पैदल रवाना हुआ। करीब 60 किलोमीटर की दूरी तय करना आसान नहीं था, लेकिन शिवभक्ति के आगे थकान और कठिनाइयां भी छोटी पड़ गईं। हर कदम पर भोलेनाथ का नाम, मंजिल पर जलाभिषेक यात्रा के दौरान भक्त भगवान शिव की आराधना करते हुए आगे बढ़ता रहा। लंबी दूरी तय करने के बाद जब वह बाबा विभूति नाथ मंदिर पहुंचा तो उसके चेहरे पर थकान के साथ संतोष भी नजर आया। मंदिर पहुंचकर उसने भगवान शिव को 51 लीटर जल अर्पित किया और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना की। मनोकामना के लिए लिया था संकल्प भक्त ने बताया कि उसने अपनी एक मनोकामना पूरी होने की इच्छा से यह संकल्प लिया था। उसका मानना है कि सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने वाले भक्तों की पुकार भोलेनाथ जरूर सुनते हैं। इसी विश्वास के साथ उसने कठिन पैदल यात्रा करने का फैसला लिया। 60 किलोमीटर की दूरी ने लिया आस्था का इम्तिहान करीब 60 किलोमीटर की पैदल यात्रा और 51 लीटर जल को साथ लेकर चलना भक्त के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं था। रास्ते में शारीरिक थकान और परेशानी के बावजूद उसने अपना संकल्प पूरा किया। भक्त का कहना है कि भगवान शिव के प्रति विश्वास और मन में मौजूद श्रद्धा ने उसे लगातार आगे बढ़ने की ताकत दी। बोला- भोलेनाथ मेरी मनोकामना जरूर पूरी करेंगे मंदिर में जलाभिषेक के बाद भक्त ने कहा कि उसे भगवान शिव शंकर पर पूरा भरोसा है। उसने कहा, “मुझे विश्वास है कि भोलेनाथ मेरी इस कठिन यात्रा को सफल बनाएंगे और मेरी सभी इच्छाएं पूरी करेंगे।” उसकी आस्था और संकल्प मंदिर पहुंचे अन्य श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहे। यह यात्रा इस बात का उदाहरण बनी कि श्रद्धा और विश्वास के आगे कठिन से कठिन रास्ता भी आसान हो जाता है।

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