केंद्र की मोदी सरकार गुरुवार को महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी। बिल का विपक्ष के कई दल विरोध करने और इसके परिसीमन से जुड़े प्रावधानों के खिलाफ वोट करने की तैयारी में हैं। सरकार ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ को एक बड़े सुधार के रूप में ला रही है। इसके साथ ही सरकार परिसीमन आयोग के गठन के लिए एक विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 भी पेश करेगी।
इन तीनों विधेयकों को लोकसभा की आज की कार्यवाही में सूचीबद्ध किया गया है। इस बीच इस विधेयक के खिलाफ समूचा विपक्ष खिलाफ हो गया है। परिसिमन विधेयक के खिलाफ खासतौर से दक्षिण के राज्य मोर्चा खोले गुए हैं। सीपीआई-एम नेता के. बालकृष्णन ने कहा है कि परिसिमन बिल से दक्षिणी राज्य गंभीर रूप से प्रभावित होंगे।
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मल्लिकार्जुन खरगे घर हुई बैठक
वहीं, विधेयक पेश किए जाने से एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर कई विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में यह फैसला किया गया कि इसके परिसीमन से संबंधित प्रावधानों का पुरजोर विरोध किया जाएगा। खरगे ने यह भी कहा कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों के आधार पर वर्ष 2029 से महिला आरक्षण लागू किया जाए।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा था कि अगर 2029 में लोकसभा और विभिन्न विधानसभाओं के चुनाव महिला आरक्षण के पूर्ण रूप से लागू होने के साथ कराए जाते हैं तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत तथा जीवंत बनेगा।
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लोकसभा में सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव
देश की महिलाओं को लिखे एक पत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह भी कहा था कि जब महिलाएं नीति-निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करेंगी तब विकसित भारत की यात्रा और अधिक सशक्त एवं तेज होगी। सरकार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को मूर्त रूप देने के लिए गुरुवार को जो संविधान संशोधन पेश करेगी, उसमें संसद के निचले सदन में सदस्यों की मौजूदा संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है।
संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में कुल सदस्यों की संख्या के दो तिहाई के समर्थन की जरूरत होती है। सत्तारूढ़ एनडीए के पास लोकसभा में फिलहाल यह आंकड़ा नहीं है।












