विकास खंड बांसी के असोगवा गांव में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मनाई गई। 17 अप्रैल, शुक्रवार की रात को आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों ने बाबा साहेब के योगदान को याद किया। इस अवसर पर असोगवा के ग्रामीणों ने मिलकर डॉ. अंबेडकर और तथागत गौतम बुद्ध को पुष्प अर्पित किए। सभी उपस्थित लोगों ने त्रिशरण और पंचशील ग्रहण किया। कार्यक्रम में एक-दूसरे को सम्मान भी दिया गया। कार्यक्रम के दौरान लोगों ने बारी-बारी से डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन और उनके संघर्षों पर प्रकाश डाला। गांव के मुकेश निषाद ने माइक संभालते हुए कहा कि “शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पियेगा दहाड़ेगा।” उन्होंने शिक्षा को सफलता की कुंजी बताते हुए कहा कि यह मजबूरी के हर ताले को खोलती है। मुकेश निषाद ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए बाबा साहेब के जीवन और संघर्षों को सभी के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ के संदेश को दोहराया। यह कार्यक्रम देर रात 12 बजे के बाद भी जारी रहा। इस दौरान क्षेत्र के लोगों द्वारा ढोल-बाजे के साथ बाबा साहेब के मिशनरी गीत और गाने का कार्यक्रम भी चला, जिसका लोगों ने भरपूर आनंद लिया। ‘जय भीम’ के नारे भी लगाए गए। रात 12 बजे के बाद केक काटकर सभी ने एक-दूसरे को खिलाया। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान तौलन प्रसाद, सुदामा प्रसाद, जयश्री, गोविंद, रमेश कुमार निगम, सकठू प्रसाद, महेश प्रसाद, राजेश कुमार एडवोकेट, छोटेलाल, सिंधमती, गरिमा, सुकन्या, शिवदास गुप्ता, राधेश्याम सहित तमाम ग्रामवासी उपस्थित रहे।
बांसी के असोगवा में अंबेडकर जयंती पर कार्यक्रम:शिक्षा को सफलता की कुंजी बताया गया, ग्रामीणों ने संघर्ष याद किए
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