HomeGadgetsबिजली के नियमों में बड़े बदलाव, आप पर क्या असर पड़ेगा?

बिजली के नियमों में बड़े बदलाव, आप पर क्या असर पड़ेगा?

भारत सरकार ने बिजली प्रोडक्शन को लेकर नियमों में संशोधन किया है, जिससे कैप्टिव पावर प्लांट्स से जुड़े 3 नियमों में बदलाव किया गया है। यह विद्युत अधिनियम 2003 का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। कैप्टिव पावर प्लांट्स वे होते हैं जिनमें कोई कंपनी अपनी जरूरत के हिसाब से बिजली का उत्पादन करती है।इन्हीं कैप्टिव पावर प्लांट्स के नियमों में बदलाव लाया गया है। इस बदलाव का मकसद साफ है कि उद्योगों के लिए अपनी खुद की बिजली पैदा करने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा सके। संशोधित नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।

विद्युत मंत्रालय ने 14 मार्च को संशोधित नियमों के बारे में अहम बातें बताई हैं। मंत्रालय ने कहा है कि इन नियमों को कई लोगों से सलाह लेने के बाद संशोधित किया गया है। साथ ही मंत्रालय ने बताया कि पहले कैप्टिव पावर प्लांट्स से जुड़े नियमों में अस्पष्टता थी, जिसे दूर करने के लिए नियमों में बदलाव लाया गया है। अब सवाल उठता है कि कैप्टिव पावर प्लांट के नियमों में क्या स्पष्टता लाई गई है।

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बिजली के नियम अब आसान

संशोधित नियमों के तहत कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से बिजली ले सकेंगी। बस उन्हें मालिकाना हक और खपत की कानूनी शर्तों के हिसाब से पूरा करना होगा। विद्युत मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा है कि भारतीय उद्योग अब टिकाऊ विकास और लागत कम करने के लिए सौर या पवन ऊर्जा जैसे सस्ते स्रोतों की ओर बढ़ रहा है। इसी लिए कैप्टिव बिजली उत्पादन के लिए एक लचीला और भरोसेमंद नियम होना बेहद जरूरी था। सरल नियमों से 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी।

कैप्टिव पावर प्लांट के लिए नई गाइडलाइन

कैप्टिव प्लांट वह है, जो कई उद्योग कंपनियां अपनी बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए लगाती हैं। नए नियम इन्हीं पर केंद्रित हैं। संशोधित नियमों के अनुसार अब कंपनियों की सहायक कंपनियां और होल्डिंग कंपनियों को भी एक ही कैप्टिव यूजर माना जाएगा। इससे कॉर्पोरेट समूहों के लिए मिलकर बिजली प्लांट लगाना आसान हो जाएगा। इसके अलावा अगर कई कंपनियां मिलकर एक प्लांट लगाती हैं, तो किसी एक कंपनी के तय सीमा से अधिक या कम बिजली इस्तेमाल करने पर पूरे प्लांट का कैप्टिव स्टेटस रद्द नहीं होगा।

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सरचार्ज से राहत

संशोधित नियमों के अनुसार जब तक किसी प्लांट की वेरिफिकेशन पूरी नहीं हो जाती, तब तक कंपनियों पर सरचार्ज यानी अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इससे उद्योगों पर तत्काल वित्तीय बोझ कम होगा और वे अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।

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