नई दिल्ली। चीन ने एक ऐसी बैटरी तकनीक इजाद की है, जो कि मौजूदा लिथियम-आयन बैटरी से 80 गुना सस्ती है और उससे ज्यादा चल सकती है। यह ऑल-आयरन फ्लो बैटरी तकनीक से संबंधित है। बताया जा रहा है कि यह बैटरी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। ऐसा नहीं है कि यह कोई नई तकनीक है लेकिन अपनी खामियों की वजह से इसे कभी भी लिथियम-आयन बैटरी से बेहतर नहीं माना गया था। हालांकि, अब वैज्ञानिकों ने इसमें मौजूद कमियों को दूर करके इसे इस्तेमाल के लायक बनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक लोहे वाली ये बैटरी दाम में काफी सस्ती और उम्र के मामले में लंबी चलेगी।
क्या नई है लोहे वाली बैटरी की तकनीक?
ऐसा नहीं है कि आयरन बैटरी के बारे में वैज्ञानिक अभी तक अनजान थे। इसके साथ समस्या थी कि इसे स्थिर नहीं किया जा पा रहा था। इस बैटरी के अंदर मौजूद लिक्विड में कुछ ऐसी गड़बड़ी थी कि बैटरी के अंदर कैमिकल लीक होने लगते थे। इसकी वजह से बैटरी बहुत जल्दी डेड हो जाती थी। यही वजह है कि अभी तक सिर्फ लिथियम-आयन बैटरी को ही इस्तेमाल के लायक माना जाता था क्योंकि वे ज्यादा स्थिर होती थीं।
चीनी वैज्ञानिकों ने दूर की समस्या
चीन की एकेडमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों ने इस समस्या का बेहद रोचक और स्मार्ट हल निकाला। उन्होंने सिनर्जिस्टिक डिजाइन नाम से एख तरीका निकाला, जो कि बैटरी के अंदर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। यह हानिकारक आयनों को लोहे के केंद्र तक पहुंचने ही नहीं देता। इस स्मार्ट इंजीनियरिंग के चलते बैटरी के खराब होने का सवाल ही खत्म हो गया। (REF.)
ऊर्जा का भविष्य बनेगी आयरन बैटरी
इस बैटरी को इस्तेमाल करने के ऐसे-ऐसे फायदे सामने आए कि इसे ऊर्जा का भविष्य तक कहा जा रहा है। दरअसल यह आयरन बैटरी को 6,000 से ज्यादा बार चार्ज और डिस्चार्ज होने के बावजूद परफॉर्मेंस में जस की तस बनी रही।
इतना ही नहीं, यह बैटरी पर्यावरण के अनुकूल है, क्योंकि इसमें लोहे और पानी का इस्तेमाल होता है। ये पदार्थ सस्ते भी हैं और आसानी से मिल भी जाते हैं। यह तकनीक आम लोगों तक पहुंचती है, तो न सिर्फ आपके फोन और गाड़ियां सस्ती होंगी, बल्कि बड़े स्तर पर बिजली जमा करने का खर्च भी बहुत कम हो जाएगा।












