Homeउत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)अमोढ़ा चतुर्भुज मंदिर पर पर्यटन विकास:1.02 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली

अमोढ़ा चतुर्भुज मंदिर पर पर्यटन विकास:1.02 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली

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अमोढ़ा चतुर्भुज मंदिर के पर्यटन विकास के लिए 1.02 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस कार्य की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश जल निगम की इकाई कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) को सौंपी गई है। हाल ही में, सीएंडडीएस के अभियंता जय प्रकाश ने मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान मंदिर के महंत अनिल दास जी महाराज भी उपस्थित रहे। अभियंता जय प्रकाश ने बताया कि विकास कार्यों के तहत यात्री छाजन, आरओ प्लांट, वॉटर बोरिंग और शौचालय का निर्माण किया जाएगा। यह कार्य जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। मंदिर राम जानकी मार्ग से जुड़ा हुआ है और क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। चतुर्भुज मंदिर में हर मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। आषाढ़ मास के अंतिम मंगलवार को यहां प्रसिद्ध बुढ़वा मंगल मेला भी सदियों से आयोजित होता रहा है। यह मंदिर अमोढ़ा राजघराने के राजा जालिम सिंह से भी संबंधित है। महंत अनिल दास जी महाराज ने बताया कि इन विकास कार्यों से श्रद्धालुओं को वैवाहिक कार्यक्रम, मुंडन संस्कार, कढ़ाई चढ़ाने और कथा भागवत जैसे अनेक धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन में काफी सुविधा मिलेगी। उन्होंने मंदिर के सामने स्थित सरोवर के सौंदर्यीकरण और मंदिर परिसर की बाउंड्री वॉल के निर्माण की आवश्यकता पर भी जोर दिया जाने चतुर्भुजी मंदिर के बारे में,,,,, चतुर्भुजी मंदिर के महंथ अनिल दास महराज के मुताबिक किदवंतियां है कि चतुर्भुजी बाबा अर्थात चतुर्भुज भगवान कलयुग में साक्षात प्रकट होकर अमोढ़ा के राजा ज़ालिम सिंह के गायों का दूध पी जाते थे। चरवाहों के द्वारा पता लगाने पर राजा ज़ालिम सिंह ने चतुर्भुज भगवान का पीछा किया तो चतुर्भुज भगवान पृथ्वी के अंदर समाने लगे। राजा ने लोगों से खुदाई शुरू कराई। तभी नीचे से आवाज आयी की मैं तुमको पाषाण रुप में ही मिल संकूगा और वही दिव्य रुप में चतुर्भुज भगवान पाषाण रुप में विराजमान हो गए। जो आज चतुर्भुजी भगवान के नाम से पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध हैं।
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