आगरा। आगरा से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो दिल को चीर देती है और इंसानियत से कई सवाल पूछती है। अभी दो दिन पहले ही फ्रीगंज के सूखे नाले में एक नवजात का शव मिला था… और अब उसी शहर के ग्राम चितौरा में ममता को शर्मसार करने वाली एक और घटना सामने आई है।मंगलवार की सुबह थी। गांव के खेतों में रोज की तरह मजदूर खरबूजे की फसल तोड़ने में जुटे थे। चारों ओर हरियाली थी, लेकिन उसी हरियाली के बीच एक दर्द छिपा था… एक ऐसी पीड़ा, जिसे कोई सुन नहीं रहा था।
सन्नाटे को चीरती मासूम की सिसकियां
अचानक खेतों में काम कर रहे मजदूरों को किसी बच्चे के रोने की धीमी-धीमी आवाज सुनाई दी। पहले लगा शायद भ्रम है… लेकिन आवाज बार-बार आ रही थी। जब वे झाड़ियों की तरफ बढ़े, तो उनका कलेजा कांप उठा।कांटों और झाड़ियों के बीच, एक पॉलिथीन में लिपटा नवजात पड़ा था। शरीर पर मिट्टी चिपकी हुई थी, और चींटियां उसके नन्हे जिस्म को नोच रही थीं। मासूम की सिसकियां जैसे जिंदगी से आखिरी जंग लड़ रही थीं।
एक अनजान मां की ममता बनी जीवनदान
इस अमानवीयता के बीच इंसानियत की एक किरण भी नजर आई। सूचना मिलते ही गांव की नीतू देवी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बिना एक पल गंवाए उस मासूम को अपनी गोद में उठा लिया। जैसे ही बच्चे को सीने से लगाया, उसकी सिसकियां कुछ थम सी गईं… मानो उसे अपनी मां मिल गई हो।नीतू देवी ने बच्चे को साफ किया, उसे संभाला और सीधे शमसाबाद थाने पहुंच गईं। वहां से पुलिस और बाल कल्याण अधिकारी के साथ बच्चे को अस्पताल ले जाया गया।
जिंदगी और मौत के बीच झूलता मासूम
डॉक्टरों ने जब नवजात की जांच की, तो उसकी हालत बेहद नाजुक पाई गई। वजन बहुत कम था, शरीर कमजोर… उसे तुरंत वार्मर मशीन में रखा गया। प्राथमिक इलाज के बाद उसे बेहतर उपचार के लिए आगरा रेफर कर दिया गया है।
सवालों के घेरे में ‘मां’ शब्द
इस घटना के बाद हर किसी के मन में एक ही सवाल है—क्या कोई मां इतनी कठोर हो सकती है? क्या हालात इतने बेरहम हो सकते हैं कि एक नवजात को कांटों में मरने के लिए छोड़ दिया जाए?अस्पताल में उमड़ी भीड़ उस अनजान मां को कोस रही थी, जिसने अपने ही अंश को इस तरह तड़पने के लिए छोड़ दिया।पुलिस अब जांच में जुटी है—आखिर यह मासूम किसका है? किसने उसे इस हाल में छोड़ा? आसपास के गांवों में पूछताछ की जा रही है और हर सुराग खंगाला जा रहा है।












