श्रावस्ती जनपद के नासिरगंज कस्बे में शुक्रवार को शिया समुदाय ने एक मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया। यह मजलिस स्थानीय हुसैनिया इमामबाड़े में मरहूम जकी अली (इब्ने मरहूम बबर अली) की बरसी पर उनके ईसाले सवाब के लिए रखी गई थी। मजलिस में चौगाई, बहराइच, नवाबगंज और अचेहरा सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से शिया समुदाय के लोग शामिल हुए। नासिरगंज और आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की। मजलिस की शुरुआत तिलावते कुरान (कुरान पाठ) से हुई। बहराइच से आए मौलाना अदील हुसैन साहब ने मजलिस को संबोधित किया। अपने संबोधन में मौलाना अदील हुसैन ने इंसानियत के लिए इमाम हुसैन (अ.स.) के बलिदान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मरहूम जकी अली के लिए दुआ-ए-मगफिरत की और कर्बला के वाकयात का जिक्र किया। यह मजलिस मरहूम जकी अली के परिवार द्वारा उनकी बरसी के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी। मजलिस के समापन पर मौला हुसैन और उनके बहत्तर साथियों की शहादत को याद किया गया। इसके बाद मरहूम के ईसाले सवाब के लिए फातिहा ख्वानी और दुआएं मांगी गईं। इस अवसर पर कस्बे के गणमान्य नागरिकों सहित शिया समुदाय के नाजिम अली, यूसुफ, मोहम्मद, हसनैन, मीसम हुसैन, शीबू, आकिल रिजवी, शादाब हुसैन, नाजिम रिज़वी, आरिफ, बन्ने, सिराज हैदर, सैफ और सोनू सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
नासिरगंज में मजलिस-ए-अज़ा:मौलाना अदील हुसैन ने इमाम हुसैन के बलिदान पर चर्चा की
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