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कैसे की जाती है अफीम की खेती?

अफीम की खेती में कमाई पूरी तरह उत्पादन और सरकारी ते खरीद पर निर्भर करती है अगर किसान को अच्छा उत्पादन मिलता है तो यह खेती सामान्य फसलों की तुलना में कहीं ज्यादा मुनाफा दे सकती हैं हालांकि खेती में खतरा भी उतना ही ज्यादा माना जाता है क्योंकि शर्मा से कम उत्पादन होने पर अगले साल लाइसेंस रिन्यू होने में दिक्कत आ सकती है सरकार किसानों से पूरी उपज खरीदी है और इसके लिए तय केंद्र बनाए जाते हैं किसान अपनी पूरी अफीम वहां जमा करते हैं बिना लाइसेंस की खेती करना कानूनन अपराध है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है. 

कैसे की जाती है अफीम की खेती?

अफीम की फसल ठंड के मौसम में बोई जाती है, बुवाई से करीब 3 से 4 महीने बाद पौधों में फूल आने लगते हैं. फूल झड़ने के बाद डोडे तैयार होते हैं. इन डोडों पर हल्का चीरा लगाया जाता है, जिससे सफेद रंग का तरल पदार्थ निकलता है. यही पदार्थ बाद में जमकर अफीम बनता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार इसकी खेती में सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण का विशेष ध्यान रखना पड़ता है. फसल तैयार होने के बाद डोडों को सुखाकर उनसे बीज भी निकाला जाता है.

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