लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं उपभोक्ता हितैषी बनाने के उद्देश्य से मांग की है कि राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों में लागू की गई वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था के परिणामों की निष्पक्ष समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं और पूर्व की उपभोक्ता हितैषी व्यवस्था लागू की जाय। साथ ही बिजली कर्मियों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित कर विद्युत सेवाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में ठोस पहल की जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि जिस प्रकार स्मार्ट मीटर एवं प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था के क्रियान्वयन के दौरान अनेक व्यावहारिक चुनौतियां सामने आई थीं, उसी प्रकार वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था के लागू होने के बाद भी उपभोक्ताओं तथा फील्ड स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए आवश्यक है कि इस व्यवस्था के वास्तविक प्रभावों का व्यापक मूल्यांकन किया जाए और सुधारात्मक निर्णय लिए जाएं।
संघर्ष समिति ने कहा कि विश्व स्तर पर उपभोक्ता सेवाओं के लिए सिंगल विंडो प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं सुविधाजनक माना जाता है। पूर्व में विद्युत वितरण व्यवस्था में उपखंड अधिकारी (एसडीओ) एवं अधिशासी अभियंता के पास अपने क्षेत्र से संबंधित अधिकांश कार्यों का समन्वित दायित्व होता था, जिससे उपभोक्ताओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक ही स्थान पर संपर्क करने की सुविधा मिलती थी।
वर्तमान व्यवस्था में 33 केवी एवं 11 केवी लाइनों, मीटरिंग, बिलिंग तथा अनुरक्षण (मेंटेनेंस) जैसे कार्य विभिन्न अधिकारियों एवं इकाइयों के बीच विभाजित कर दिए गए हैं। इससे कई बार उपभोक्ताओं को यह समझने में कठिनाई होती है कि उनकी समस्या के समाधान के लिए किस अधिकारी या कार्यालय से संपर्क किया जाए। परिणामस्वरूप शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब एवं असुविधा की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि उसका प्रमुख उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण, सरल एवं त्वरित विद्युत सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसी दृष्टि से वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था को वापस लिया जाय और पूर्व की तरह सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की जाए, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा मिले और जवाबदेही भी सुनिश्चित हो सके।
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि प्रदेश के बिजली कर्मी उत्पादन, पारेषण एवं वितरण क्षेत्रों में निरंतर सुधार और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस दिशा में और अधिक सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि कार्य वातावरण सहयोगात्मक एवं विश्वासपूर्ण बनाया जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि नवंबर 2024 में पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण संबंधी निर्णयों तथा उसके बाद उत्पन्न परिस्थितियों का कार्य वातावरण पर प्रभाव पड़ा है। इसलिए आवश्यक है कि अनावश्यक तौर पर शांतिपूर्ण आंदोलन के कारण की गई समस्त उत्पीड़न की कारवाइयां वापस ली जाए, निकाले गए संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल किया और सभी पक्षों के बीच संवाद एवं विश्वास का वातावरण विकसित किया जाए, जिससे विद्युत सेवाओं की गुणवत्ता और कार्यकुशलता में और अधिक सुधार हो सके।
संघर्ष समिति ने सुझाव दिया कि वितरण क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए बिजली कर्मियों के अनुभव एवं सुझावों का समुचित उपयोग किया जाए। इससे उपभोक्ता सेवाओं में सुधार, तकनीकी एवं वाणिज्यिक हानियों में कमी तथा निगमों की कार्यक्षमता में वृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्पादन निगम तथा ट्रांसको में प्राप्त सकारात्मक उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि उचित नीतिगत सहयोग, संसाधनों एवं सकारात्मक कार्य वातावरण के माध्यम से उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उत्पादन निगम निरंतर लाभ अर्जित कर रहा है तथा पारेषण क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।
संघर्ष समिति का विश्वास है कि प्रदेश के समर्पित एवं अनुभवी बिजली कर्मी, जिन्हें उत्पादन एवं पारेषण क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलताएं प्राप्त हुई हैं, वितरण क्षेत्र में भी गुणात्मक सुधार कर उत्तर प्रदेश के विद्युत वितरण निगमों को देश के अग्रणी संस्थानों की श्रेणी में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं।












