शिमला। अगर 15 जून की सुबह 10:30 बजे आपके कॉलेज, विश्वविद्यालय या किसी शैक्षणिक संस्थान में अचानक आपदा अलार्म बजने लगे तो घबराने की जरूरत नहीं होगी। यह किसी वास्तविक आपदा का संकेत नहीं, पूरे हिमाचल प्रदेश में होने वाली एक बड़ी मॉक ड्रिल का हिस्सा होगा और इसके जरिए भूकंप, क्लाउड बर्स्ट और वनाग्नि जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों को परखा जाएगा। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में 15 जून को 10वीं राज्य स्तरीय मेगा मॉक एक्सरसाइज आयोजित की जा रही है। इस दौरान प्रदेश के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, पुस्तकालयों तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों को अनिवार्य रूप से भाग लेना होगा।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. हरीश कुमार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सुबह 10:30 बजे संस्थानों में निकासी (एवाक्यूएशन) ड्रिल शुरू होगी। इसके बाद हेड काउंट एक्सरसाइज कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी सुरक्षित स्थानों तक पहुंच गए हैं। पूरी प्रक्रिया 15 मिनट के भीतर पूरी करनी होगी। निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि इस दौरान किसी प्रकार का प्रदर्शनात्मक अभ्यास नहीं होगा। मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में लोगों की त्वरित प्रतिक्रिया, सुरक्षित निकासी और संस्थानों की तैयारियों का आकलन करना है।
ड्रिल के दौरान होने वाली सभी गतिविधियों का दस्तावेजीकरण किया जाएगा और उन्हें विभाग द्वारा विकसित सेफ्टी ऐप पर अपलोड करना होगा। साथ ही विद्यार्थियों और कर्मचारियों को आपदा के समय बरती जाने वाली सावधानियों, बचाव उपायों और त्वरित प्रतिक्रिया के बारे में भी जागरूक किया जाएगा। बता दें कि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील राज्य माना जाता है। ऐसे में सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भूकंप, क्लाउड बर्स्ट, वनाग्नि या अन्य आपदाओं की स्थिति में जनहानि और नुकसान को कम से कम रखा जा सके तथा शैक्षणिक संस्थानों की आपदा प्रबंधन क्षमता को और मजबूत बनाया जा सके। 15 जून की यह मेगा मॉक एक्सरसाइज इसी तैयारी की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है।
15 जून को हिमाचल में बजेगा आपदा अलार्म, मेगा मॉक ड्रिल में परखी जाएगी तैयारियां
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