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विक्रमजोत विकास क्षेत्र के शंकरपुर गांव में स्थित नलकूप संख्या 74 एचजी की हालत बदतर है। नलकूप का भवन और मोटर दुरुस्त होने के बावजूद, किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। इसकी मुख्य वजह नलकूप की ध्वस्त नालियां और विभागीय उदासीनता है, जिससे किसान महंगे उपकरणों से सिंचाई करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार, यह नलकूप करीब तीन से चार दशक पहले किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था। माता प्रसाद मौर्य, बब्बू, राज कुमार और दुर्गा प्रसाद मौर्य सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि अब यह नलकूप केवल एक दिखावा बनकर रह गया है। लगभग डेढ़ दशक पहले तक इससे सिंचाई का कार्य सुचारु रूप से होता था। पहले मोटर और लाइन खराब होने की समस्या थी, जिसे अब ठीक कर लिया गया है। हालांकि, वर्तमान में नलकूप की वितरण नालियां पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी हैं और उन पर झाड़ियां उग आई हैं। इस कारण नलकूप से पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। किसानों द्वारा आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत करने पर विभाग ने बताया कि नालियों की मरम्मत का कार्य वृहद श्रेणी का है। इसके लिए किसी वृहद परियोजना के तहत वित्तीय स्वीकृति मिलने पर ही मरम्मत संभव हो पाएगी। कुछ वर्ष पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के चौड़ीकरण के दौरान एक पुलिया टूट गई थी, जिससे दर्जनों किसानों को मिलने वाली पानी की आपूर्ति बंद हो गई। इसी दौरान विक्रमजोत के एक व्यक्ति ने नाली को अपनी चारदीवारी के अंदर कर उसका अस्तित्व मिटाने का प्रयास किया, जिसमें विभाग की मौन स्वीकृति भी देखी गई। गांव के कुछ किसानों की शिकायत के बाद विभाग हरकत में आया और पुलिया व टूटी नाली को बचाया जा सका। हालांकि, विभाग अभी भी पुलिया और नाली की मरम्मत का कार्य नहीं करा पाया है। परिणामस्वरूप, किसानों को आज भी महंगे डीजल का उपयोग करके सिंचाई करनी पड़ रही है।
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शंकरपुर नलकूप की नालियां ध्वस्त, किसानों को पानी नहीं:NH-27 चौड़ीकरण में टूटी पुलिया, विभाग की उदासीनता से सिंचाई बाधित
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