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बाल टीबी प्रबंधन पर मेडिकल अफसरों को प्रशिक्षण:बच्चों में दो सप्ताह से अधिक बुखार-खांसी पर जांच की सलाह


बहराइच में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत गुरुवार को सीएमओ कार्यालय सभागार में मेडिकल अधिकारियों के लिए बाल टीबी प्रबंधन पर प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान विशेषज्ञों ने बच्चों में दो सप्ताह से अधिक समय तक बुखार, खांसी या लगातार वजन कम होने पर तत्काल टीबी की जांच कराने की सलाह दी। कार्यशाला वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर्स (डब्ल्यूएचपी) के पीडियाट्रिक प्रोग्राम के तहत आयोजित की गई। इसका उद्देश्य जिले के मेडिकल अधिकारियों की बाल टीबी के निदान और उपचार संबंधी क्षमता को मजबूत करना था। प्रशिक्षण सत्र में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एम.एल. वर्मा, मास्टर ट्रेनर डॉ. परितोष तिवारी और डब्ल्यूएचओ कंसलटेंट डॉ. दीपक चतुर्वेदी ने चिकित्सकों को बाल टीबी की स्क्रीनिंग, निदान और उपचार प्रबंधन की नवीनतम तकनीकों की जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों में टीबी की पुष्टि के लिए उम्र के अनुसार सही सैंपल कलेक्शन और आधुनिक जांच तकनीकों का उपयोग बेहद महत्वपूर्ण है, जिससे बीमारी की जल्द पहचान कर समय पर उपचार शुरू किया जा सके। डॉ. एम.एल. वर्मा ने अभिभावकों से बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार बुखार रहे, दवा के बावजूद खांसी ठीक न हो या पिछले तीन महीनों में लगातार वजन कम हो रहा हो, तो तत्काल नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर टीबी की जांच करानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि परिवार का कोई सदस्य फेफड़ों की टीबी से पीड़ित है और बच्चा उसके संपर्क में आया है, तो उसकी जांच कराना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बच्चों में टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी की जांच, दवाएं और पूरा उपचार निःशुल्क उपलब्ध है। इसलिए अभिभावक बिना किसी संकोच के समय पर जांच और इलाज कराएं। कार्यशाला में वर्ल्ड हेल्थ पार्टनर्स के प्रतिनिधियों के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।

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