जरवलरोड/बहराइच। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के महज एक महीने में धंसने और टूटने की खबरों के बाद अब बुनियादी ढांचे के निर्माण में घटिया सामग्री और लापरवाही को लेकर बहस तेज हो गई है। इस मामले में संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा कार्यदायी संस्था ‘पीएनसी इन्फ्राटेक’ को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने के लिए नोटिस भी जारी किया जा चुका है। हालांकि, लखनऊ को पड़ोसी देश नेपाल से जोड़ने वाले लखनऊ-बहराइच हाईवे पर सफर करने वाले राहगीरों और स्थानीय निवासियों के लिए इस कंपनी की कार्यशैली से उत्पन्न बदहाली कोई नई बात नहीं है।
देवीपाटन मंडल और बहराइच क्षेत्र के लोग वर्षों से इस कंपनी के निर्माण की अनियमितताओं का खामियाजा भुगत रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पीएनसी इन्फ्राटेक ने ही लखनऊ-बहराइच हाईवे पर जरवल रोड क्षेत्र में करीब 60 करोड़ की लागत से लखनऊ गोंडा रेलवे लाइन के ऊपर ‘जरवल रोड कुड़वा ओवरब्रिज’ का निर्माण कराया था, जिसका लोकार्पण 28 अगस्त 2018 को किया गया था।
लेकिन उद्घाटन के मात्र चार महीने बाद, दिसंबर 2018 में ही ओवरब्रिज के सीमेंटेड पैनल खिसकने लगे और मुख्य सड़क जगह-जगह से धंस गई। दुर्घटनाओं की आशंका के चलते ब्रिज को दो महीने के लिए पूरी तरह बंद करना पड़ा। उस दौरान ड्रिलिंग तकनीक के जरिए लोहे और स्टील मिक्स छड़ों से सीमेंटेड पैनलों को बांधा गया और गड्ढों को भरकर यातायात बहाल किया गया। निर्माण के ठीक एक साल बाद फिर से गंभीर तकनीकी खराबी आई, जिसके बाद दोबारा भारी मरम्मत कार्य कराना पड़ा।
गत 12 जुलाई को तीसरी बार इस ओवरब्रिज के 8 सीमेंटेड पैनल अचानक खिसक गए, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। वर्तमान में भी पुल पर इमरजेंसी पैचवर्क व मरम्मत का काम जारी है और यह बीते 28 दिन से बंद है जिससे लोग जरवल रोड रेलवे क्रॉसिंग पर लंबा जाम झेल रहे है। स्थानीय स्तर पर लगातार यह शिकायतें रही हैं कि निर्माण के शुरुआती चरण से ही कंपनी ने मानकों की अनदेखी की और अत्यधिक अनियमितताएं बरतीं।
सड़कों के समतल न होने के कारण तेज रफ्तार वाहन पुल पर उछल जाते हैं, जिससे चालकों को बेहद नियंत्रित गति में गाड़ियां चलानी पड़ती हैं। एक तरफ जहां लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की बदहाली के बाद विभाग ने पीएनसी इन्फ्राटेक को नोटिस थमाया है, वहीं दूसरी ओर जुलाई माह में कंपनी को 6969 करोड़ की लागत से बनने वाले ‘बाराबंकी-बहराइच फोरलेन हाईवे’ का नया और बड़ा प्रोजेक्ट सौंप दिया गया है। पुराने ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए अब बहराइच, बाराबंकी और पूरे देवीपाटन मंडल के लोगों में नए फोरलेन की टिकाऊपन और सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्याप्त हो गई है।
आम जनमानस और सोशल मीडिया पर इस निर्णय को लेकर कड़ी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। सोशल मीडिया पर लोग इस बात से बहुत चिंतित हैं कि नए फोरलेन का भविष्य भी जरवल रोड ओवरब्रिज जैसा न हो जाए। लोगो का कहना है कि वे बेहतर सड़कें चाहते हैं, लेकिन गुणवत्ता व सुरक्षा की कीमत पर कोई समझौता न हो। शासन-प्रशासन को जनता के इस डर का संज्ञान लेते हुए निर्माण कार्य शुरू होने से पहले सख्त गुणवत्ता शर्तें लागू करनी चाहिए।












