लखनऊ। अखिल भारत नागरिक परिषद के नेतृत्व में कर्मचारी, शिक्षक, बुद्धिजीवी एवं आम नागरिकों ने आज काकोरी स्थित शहीद स्मारक पर काकोरी क्रांति के 101 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अमर शहीदों को श्रद्धा-सुमन अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले काकोरी के अमर क्रांतिकारियों को नमन करते हुए उनके संघर्ष, साहस और राष्ट्रप्रेम को याद किया गया।
इस अवसर पर ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने 101 वर्ष पूर्व काकोरी में हुई ऐतिहासिक ट्रेन एक्शन की घटना का जीवंत वर्णन करते हुए काकोरी क्रांति के अमर शहीदों के जीवन और उनके अदम्य साहस पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि काकोरी क्रांति में किसी अंग्रेज की हत्या नहीं की गई थी, लेकिन इस घटना से ब्रिटिश हुकूमत इस कदर भयभीत हो गई थी कि उसने क्रांतिकारियों पर कठोर मुकदमा चलाकर पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र लाहिड़ी और ठाकुर रोशन सिंह को फांसी की सजा दे दी। काकोरी कांड के प्रमुख क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद को भी ब्रिटिश सरकार गिरफ्तार नहीं कर सकी।
काकोरी क्रांति के 101 वर्ष पूर्ण होने पर दी अमर शहीदों को श्रद्धांजलि
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