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बस्ती जिले के अमोढ़ा स्थित प्रतापी राजा जालिम सिंह और वीरांगना रानी के किले पर लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से निर्मित संग्रहालय, वॉकिंग पाथ, मॉडल शौचालय और आरओ प्लांट रखरखाव के अभाव में बदहाल स्थिति में हैं। यह ऐतिहासिक स्थल वर्तमान में उजाड़ और घास-फूस से भरा पड़ा है। स्थल की दुर्दशा का आलम यह है कि यहां लगाई गई दर्जनों स्ट्रीट सोलर लाइटें गायब हो चुकी हैं, केवल उनके खंभे शेष हैं। एक दर्जन सीमेंट की बेंचें भी टूट चुकी हैं।संग्रहालय की लोहे की खिड़कियां,उनके कांच और दरवाजे उखाड़ लिए गए हैं,जबकि मुख्य दरवाजा भी क्षतिग्रस्त हो गया है।इस संग्रहालय का निर्माण अमोढ़ा राज्य के उन राजाओं के इतिहास और पांडुलिपियों को संजोने के उद्देश्य से किया गया था, जिन्होंने अंग्रेजी सेना से लोहा लिया था। इसका लक्ष्य था कि आने वाली पीढ़ियां इन शहीदों को याद कर सकें,लेकिन वर्तमान में यह अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है। शहीद स्थल के चारों तरफ इंटरलॉकिंग लगाकर बनाया गया वॉकिंग पाथ भी साफ-सफाई के अभाव में झाड़-झंखाड़ में तब्दील हो गया है। किले के टीले की मिट्टी बरसात के पानी से धंस रही है। राम जानकी मार्ग से अमोढ़ा किले तक जाने वाले मार्ग पर बना राजा जालिम सिंह शहीद गेट तो मौजूद है, लेकिन रास्ता संकरा है। अमोढ़ा रानी के तालाब केसौंदर्यीकरण पर लाखों रुपये खर्च होने केबावजूद वह बिना पानी और घास-फूस से बदहाल है। किले के किसी एक दरवाजे का बचा हुआ अवशेष आज भी अमोढ़ा राज्य की कहानी बयां करता है कि किस तरह अंग्रेजी सेना ने तोपखाने से इस राजमहल को ध्वस्त किया था। स्वतंत्रता दिवस नजदीक है, लेकिन इस ऐतिहासिक स्थल पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जो इसकी उपेक्षा को दर्शाता है। क्षेत्र के ग्रामीण प्रवेश शर्मा, रवि सिंह, अखिलेश गौड़, पंकज श्रीवास्तव और विजय कुमार का कहना है कि अमोढ़ा राजकोट हमारी ऐतिहासिक धरोहर है। यहां जो भी विकास कार्य हुए थे, वे अच्छे थे, लेकिन रखरखाव के अभाव में स्थिति बदहाल हो गई है। इस संबंध में विक्रमजोत के बीडीओ संदीप कुमार सिंह ने बताया कि जल्द ही वहां सफाई कर्मियों को लगाकर साफ-सफाई कराई जा रही है।
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अमोढ़ा संग्रहालय बदहाल, करोड़ों खर्च के बाद भी दुर्दशा:रखरखाव के अभाव में वॉकिंग पाथ, सोलर लाइटें और शौचालय गायब
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