नरकटहा, डोमरा, गांगी, हरखपूरा, रानीपुर और औरहिया सहित कई गांवों में नीलगायों का प्रकोप बढ़ गया है। झुंड में खेतों में घुसकर नीलगायें गेहूं, सरसों और चना सहित रबी की अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। इससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों पर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण महेश गुप्ता, राजकुमार, प्रिंस कुमार, श्रीराम कन्नौजिया और देवेंद्र गुप्ता ने बताया कि नीलगायें खासकर रात के समय खेतों में घुसकर फसलों को रौंद देती हैं। दिन में भी इनके झुंड दिखाई देते हैं, जिससे खेतों की रखवाली करना बेहद मुश्किल हो गया है। किसान अपने परिवार के साथ बारी-बारी से रातभर खेतों में जागकर फसल बचाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नीलगायों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन इन्हें नियंत्रित करने के लिए अब तक कोई ठोस और स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। खेतों के चारों ओर लगाई गई अस्थायी घेराबंदी और कंटीले तार भी इन जानवरों को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं। इस स्थिति से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे भविष्य की फसल को लेकर उनकी चिंताएं गहरी हो गई हैं। किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि नीलगायों के आतंक से निजात दिलाने के लिए प्रभावी योजना बनाई जाए, ताकि फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और उन्हें राहत मिल सके।
नीलगायों से फसलें बर्बाद, किसान परेशान: रबी फसलें चौपट, नरकटहा समेत कई गांवों में दहशत – Gangi bazar(Maharajganj sadar) News
नरकटहा, डोमरा, गांगी, हरखपूरा, रानीपुर और औरहिया सहित कई गांवों में नीलगायों का प्रकोप बढ़ गया है। झुंड में खेतों में घुसकर नीलगायें गेहूं, सरसों और चना सहित रबी की अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। इससे किसानों की मेहनत और लागत दोनों पर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण महेश गुप्ता, राजकुमार, प्रिंस कुमार, श्रीराम कन्नौजिया और देवेंद्र गुप्ता ने बताया कि नीलगायें खासकर रात के समय खेतों में घुसकर फसलों को रौंद देती हैं। दिन में भी इनके झुंड दिखाई देते हैं, जिससे खेतों की रखवाली करना बेहद मुश्किल हो गया है। किसान अपने परिवार के साथ बारी-बारी से रातभर खेतों में जागकर फसल बचाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के अनुसार, नीलगायों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन इन्हें नियंत्रित करने के लिए अब तक कोई ठोस और स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। खेतों के चारों ओर लगाई गई अस्थायी घेराबंदी और कंटीले तार भी इन जानवरों को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं। इस स्थिति से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे भविष्य की फसल को लेकर उनकी चिंताएं गहरी हो गई हैं। किसानों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि नीलगायों के आतंक से निजात दिलाने के लिए प्रभावी योजना बनाई जाए, ताकि फसलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और उन्हें राहत मिल सके।









































