श्रीदत्तगंज थाना क्षेत्र के ग्राम गुमड़ी (शुक्लागंज बाजार) में संचालित मेसर्स जे.के. ईंट उद्योग का सत्र 2025–26 के लिए लाइसेंस नवीनीकरण जिला प्रशासन द्वारा निलंबित कर दिया गया है। संयुक्त खातेदारी की भूमि पर संचालित ईंट-भट्ठे के लिए सभी सहखातेदारों की अनिवार्य सहमति तथा भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति प्रस्तुत न किए जाने के कारण यह कार्रवाई की गई है। जिला प्रशासन के खनिज अनुभाग से जारी पत्र के अनुसार ईंट-भट्ठा गाटा संख्या 893 (रकबा 2.8410 हेक्टेयर) स्थित संयुक्त खातेदारी की भूमि पर संचालित है। खनन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि उक्त गाटा में सामान्य मिट्टी के खनन एवं परिवहन के लिए सभी सहखातेदारों की लिखित सहमति आवश्यक है। इसके बावजूद भट्ठा संचालक द्वारा सभी सहखातेदारों की सहमति प्रस्तुत नहीं की गई। खनन अधिकारी ने अपने पत्र में यह भी निर्देश दिया है कि जब तक सभी सहखातेदारों की लिखित सहमति उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक उक्त गाटा से किसी भी प्रकार का खनन अथवा परिवहन कार्य नहीं किया जाएगा। बिना सहमति खनन कार्य पाए जाने की स्थिति में भट्ठा संचालक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी संचालक की होगी। प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार सहखातेदार अनवरउल्लाह खान द्वारा ईंट-भट्ठा संचालन पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि संबंधित भूमि अभी भी कृषि श्रेणी में दर्ज है। ऐसे में ईंट-भट्ठा संचालन के लिए धारा 143 के अंतर्गत भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति लेना अनिवार्य था, जो इस प्रकरण में प्राप्त नहीं की गई। मामले में उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में जिला पंचायत प्रशासन द्वारा सभी पक्षों को सुनने के उपरांत निर्णय लिया गया। अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत बलरामपुर ने नियमों एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ईंट-भट्ठा लाइसेंस के नवीनीकरण को निलंबित एवं स्थगित करने का आदेश पारित किया। वहीं, आपत्तिकर्ता पक्ष की ओर से शाहिद रजा खान पुत्र अनवरुल्लाह खान ने बताया कि वर्ष 2000 में ईंट-भट्ठा संचालन प्रारंभ हुआ था। उस समय उनके पिता-भट्ठा संचालक (जो आपस में सगे भाई हैं) के बीच यह सहमति बनी थी कि भट्ठा एक-तिहाई (1/3) हिस्सेदारी में चलेगा, जिसमें सभी पार्टनरों का हिसाब बराबर रहेगा। इसका निर्धारण उनके दादा द्वारा वर्ष 1999 में ही कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि चाचा और पिता के बीच लगभग दो वर्ष तक ही सeमांजस्य बना रहा। इसके बाद चाचा ने पिता से कहा कि आप घर रहेंगे, हम आपको हर साल 50 हजार ईंटें देंगे और ईंट-भट्ठे की संरचना में सभी की आधी-आधी (1/2) हिस्सेदारी बनी रहेगी। यह भी कहा गया कि जब भट्ठा बंद किया जाएगा अथवा किसी प्रकार की असहमति उत्पन्न होगी, तब आप अपना हिस्सा ले सकते हैं, क्योंकि भट्ठे की संरचना उनके दादा के दौर की है। आरोप है कि लंबे समय से इस सहमति का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते भट्ठा संचालन पर आपत्ति दर्ज कराई गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी सहखातेदारों की लिखित सहमति अथवा विधिवत बंटवारा एवं भूमि उपयोग परिवर्तन की वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं की जाती, तब तक ईंट-भट्ठा लाइसें
जे.के. ईंट उद्योग का लाइसेंस निलंबित:सहखातेदारों की सहमति, भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति न मिलने पर कार्रवाई
श्रीदत्तगंज थाना क्षेत्र के ग्राम गुमड़ी (शुक्लागंज बाजार) में संचालित मेसर्स जे.के. ईंट उद्योग का सत्र 2025–26 के लिए लाइसेंस नवीनीकरण जिला प्रशासन द्वारा निलंबित कर दिया गया है। संयुक्त खातेदारी की भूमि पर संचालित ईंट-भट्ठे के लिए सभी सहखातेदारों की अनिवार्य सहमति तथा भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति प्रस्तुत न किए जाने के कारण यह कार्रवाई की गई है। जिला प्रशासन के खनिज अनुभाग से जारी पत्र के अनुसार ईंट-भट्ठा गाटा संख्या 893 (रकबा 2.8410 हेक्टेयर) स्थित संयुक्त खातेदारी की भूमि पर संचालित है। खनन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि उक्त गाटा में सामान्य मिट्टी के खनन एवं परिवहन के लिए सभी सहखातेदारों की लिखित सहमति आवश्यक है। इसके बावजूद भट्ठा संचालक द्वारा सभी सहखातेदारों की सहमति प्रस्तुत नहीं की गई। खनन अधिकारी ने अपने पत्र में यह भी निर्देश दिया है कि जब तक सभी सहखातेदारों की लिखित सहमति उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक उक्त गाटा से किसी भी प्रकार का खनन अथवा परिवहन कार्य नहीं किया जाएगा। बिना सहमति खनन कार्य पाए जाने की स्थिति में भट्ठा संचालक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी संचालक की होगी। प्रशासनिक अभिलेखों के अनुसार सहखातेदार अनवरउल्लाह खान द्वारा ईंट-भट्ठा संचालन पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि संबंधित भूमि अभी भी कृषि श्रेणी में दर्ज है। ऐसे में ईंट-भट्ठा संचालन के लिए धारा 143 के अंतर्गत भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति लेना अनिवार्य था, जो इस प्रकरण में प्राप्त नहीं की गई। मामले में उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में जिला पंचायत प्रशासन द्वारा सभी पक्षों को सुनने के उपरांत निर्णय लिया गया। अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत बलरामपुर ने नियमों एवं उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ईंट-भट्ठा लाइसेंस के नवीनीकरण को निलंबित एवं स्थगित करने का आदेश पारित किया। वहीं, आपत्तिकर्ता पक्ष की ओर से शाहिद रजा खान पुत्र अनवरुल्लाह खान ने बताया कि वर्ष 2000 में ईंट-भट्ठा संचालन प्रारंभ हुआ था। उस समय उनके पिता-भट्ठा संचालक (जो आपस में सगे भाई हैं) के बीच यह सहमति बनी थी कि भट्ठा एक-तिहाई (1/3) हिस्सेदारी में चलेगा, जिसमें सभी पार्टनरों का हिसाब बराबर रहेगा। इसका निर्धारण उनके दादा द्वारा वर्ष 1999 में ही कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि चाचा और पिता के बीच लगभग दो वर्ष तक ही सeमांजस्य बना रहा। इसके बाद चाचा ने पिता से कहा कि आप घर रहेंगे, हम आपको हर साल 50 हजार ईंटें देंगे और ईंट-भट्ठे की संरचना में सभी की आधी-आधी (1/2) हिस्सेदारी बनी रहेगी। यह भी कहा गया कि जब भट्ठा बंद किया जाएगा अथवा किसी प्रकार की असहमति उत्पन्न होगी, तब आप अपना हिस्सा ले सकते हैं, क्योंकि भट्ठे की संरचना उनके दादा के दौर की है। आरोप है कि लंबे समय से इस सहमति का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते भट्ठा संचालन पर आपत्ति दर्ज कराई गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी सहखातेदारों की लिखित सहमति अथवा विधिवत बंटवारा एवं भूमि उपयोग परिवर्तन की वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं की जाती, तब तक ईंट-भट्ठा लाइसें










































