शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में एसआईआर (विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण) अभियान के तहत कई महिलाओं को नागरिकता से जुड़े नोटिस जारी किए गए हैं। ये नोटिस उन महिलाओं को मिले हैं जो मूल रूप से नेपाल की निवासी हैं और वर्षों पहले भारत में विवाह कर यहां बस गई थीं। इस कार्रवाई से नेपाल और भारत के बीच दशकों पुरानी ‘रोटी-बेटी’ की परंपरा पर संकट गहरा गया है। नोटिस पाने वालों में कई ऐसी महिलाएं शामिल हैं जिनकी शादियों को लंबा समय हो चुका है और उनके बच्चे भी हैं। इनमें ग्राम औदही कला की नजरा खातून (पति सकीर अली) शामिल हैं, जिनकी शादी को 15 वर्ष हो चुके हैं और उनके पांच बच्चे हैं। राजकुमारी (पति रघुवीर) की शादी को 28 वर्ष हो चुके हैं और उनके चार बच्चे हैं। इसी तरह, जिंघा गांव की निर्मला (पति वेदप्रकाश) की शादी को 20 वर्ष और तीन बच्चे हैं। सुषमा शुक्ला (पति राहुल शुक्ला) की शादी को 6 वर्ष और एक बच्चा है। नूरजहां (पति रमजान) की शादी को 5 वर्ष और एक बच्चा है, जबकि जैनब (पति मुनव्वर अली) की शादी को 15 वर्ष और पांच बच्चे हैं। इन सभी महिलाओं के पास आधार कार्ड, बैंक पासबुक, राशन कार्ड, वोटर आईडी और परिवार रजिस्टर जैसे आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं। इसके बावजूद नागरिकता संबंधी नोटिस मिलने से प्रभावित परिवारों में भय और असमंजस का माहौल है। इस संबंध में एसडीएम विवेकानंद मिश्र ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है। उन्होंने बताया कि नेपाल से आई महिलाओं को अपनी नागरिकता या पात्रता सिद्ध करने के लिए 13 वैध दस्तावेजों में से कोई एक जमा करना होगा। इन 13 दस्तावेजों में केंद्र/राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रम के नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी का पहचान पत्र/पेंशन भुगतान आदेश, 01.07.1987 से पहले भारत में सरकार/स्थानीय प्राधिकरण/बैंक/डाकघर/एलआईसी/पीएसयू द्वारा जारी पहचान पत्र या अभिलेख, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मैट्रिकुलेशन/शैक्षिक प्रमाण पत्र, स्थायी निवासी प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, ओबीसी/एससी/एसटी या अन्य जाति प्रमाण पत्र, और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर आदि शामिल हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि वर्षों से यहां रह रही इन महिलाओं और उनके बच्चों के भविष्य को देखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए। उनका कहना है कि ऐसा करने से भारत-नेपाल के बीच सदियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते पर कोई आंच नहीं आएगी।
भारत-नेपाल की 'रोटी-बेटी' परंपरा पर संकट गहराया:शोहरतगढ़ में नेपाल मूल की महिलाओं को नागरिकता नोटिस
शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में एसआईआर (विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण) अभियान के तहत कई महिलाओं को नागरिकता से जुड़े नोटिस जारी किए गए हैं। ये नोटिस उन महिलाओं को मिले हैं जो मूल रूप से नेपाल की निवासी हैं और वर्षों पहले भारत में विवाह कर यहां बस गई थीं। इस कार्रवाई से नेपाल और भारत के बीच दशकों पुरानी ‘रोटी-बेटी’ की परंपरा पर संकट गहरा गया है। नोटिस पाने वालों में कई ऐसी महिलाएं शामिल हैं जिनकी शादियों को लंबा समय हो चुका है और उनके बच्चे भी हैं। इनमें ग्राम औदही कला की नजरा खातून (पति सकीर अली) शामिल हैं, जिनकी शादी को 15 वर्ष हो चुके हैं और उनके पांच बच्चे हैं। राजकुमारी (पति रघुवीर) की शादी को 28 वर्ष हो चुके हैं और उनके चार बच्चे हैं। इसी तरह, जिंघा गांव की निर्मला (पति वेदप्रकाश) की शादी को 20 वर्ष और तीन बच्चे हैं। सुषमा शुक्ला (पति राहुल शुक्ला) की शादी को 6 वर्ष और एक बच्चा है। नूरजहां (पति रमजान) की शादी को 5 वर्ष और एक बच्चा है, जबकि जैनब (पति मुनव्वर अली) की शादी को 15 वर्ष और पांच बच्चे हैं। इन सभी महिलाओं के पास आधार कार्ड, बैंक पासबुक, राशन कार्ड, वोटर आईडी और परिवार रजिस्टर जैसे आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं। इसके बावजूद नागरिकता संबंधी नोटिस मिलने से प्रभावित परिवारों में भय और असमंजस का माहौल है। इस संबंध में एसडीएम विवेकानंद मिश्र ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र भारत सरकार द्वारा जारी किया जाता है। उन्होंने बताया कि नेपाल से आई महिलाओं को अपनी नागरिकता या पात्रता सिद्ध करने के लिए 13 वैध दस्तावेजों में से कोई एक जमा करना होगा। इन 13 दस्तावेजों में केंद्र/राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रम के नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी का पहचान पत्र/पेंशन भुगतान आदेश, 01.07.1987 से पहले भारत में सरकार/स्थानीय प्राधिकरण/बैंक/डाकघर/एलआईसी/पीएसयू द्वारा जारी पहचान पत्र या अभिलेख, जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मैट्रिकुलेशन/शैक्षिक प्रमाण पत्र, स्थायी निवासी प्रमाण पत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, ओबीसी/एससी/एसटी या अन्य जाति प्रमाण पत्र, और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर आदि शामिल हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि वर्षों से यहां रह रही इन महिलाओं और उनके बच्चों के भविष्य को देखते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए। उनका कहना है कि ऐसा करने से भारत-नेपाल के बीच सदियों पुराने ‘रोटी-बेटी’ के रिश्ते पर कोई आंच नहीं आएगी।










































