लखनऊ। कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान एक ऐतिहासिक मानवीय पहल की शुरुआत हुई,जब ‘अपनी थाली’ कार्यक्रम के तहत भर्ती कैंसर मरीजों के तीमारदारों को पहली बार रात्रि भोजन परोसा गया।
पहले ही दिन कल्याण सिंह सुपर स्पेशलिटी कैंसर संस्थान में उपचाराधीन मरीजों के 360 परिजन आगे आए और उन्हें गरम, पौष्टिक भोजन परोसा गया — यह संख्या प्रारंभिक अनुमान से कहीं अधिक रही। पहली थाली डॉ. वरुण विजय, चिकित्सा अधीक्षक, द्वारा परोसी गई, जिन्होंने संस्थान के निदेशक डॉ. एम.एल.बी. भट्ट और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजेंद्र कुमार के इस संकल्प को दोहराया कि “कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान न केवल मरीजों को बल्कि उनके साथ आए तीमारदारों को भी एक संपूर्ण, देखभाल भरा वातावरण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
वह समस्या जिसकी कोई बात नहीं करता
कैंसर का संघर्ष केवल एक व्यक्ति का नहीं होता। लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती मरीज के साथ उनके परिजन — मां, पिता, पति-पत्नी, बच्चे, भाई-बहन — हफ्तों और महीनों तक साथ बने रहते हैं। जबकि अस्पताल मरीज़ को पोषण युक्त भोजन देता है, तीमारदार प्रायः बाहरी खाने पर निर्भर रहते हैं — जो महंगा होता है,आसानी से उपलब्ध नहीं होता,और लंबे समय तक लेने पर अस्वास्थ्यकर भी। लगातार मानसिक तनाव और अपर्याप्त पोषण मिलकर तीमारदार को ठीक उस समय कमजोर बनाते हैं,जब मरीज को उनकी सबसे अधिक जरूरत होती है।
एक रुपया — दान नहीं, सहभाग
अपनी थाली सहभाग की भावना पर बनी है, दान की भावना पर नहीं। प्रत्येक प्राप्तकर्ता की गरिमा और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए, तीमारदारों को केवल एक रुपये का स्वैच्छिक अंशदान करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। भोजन कभी भी अंशदान न करने पर रोका नहीं जाता — लेकिन यह एक रुपया दान नहीं है; यह दो बराबर इंसानों के बीच सहभाग का प्रतीक है। यही सोच ‘अपनी थाली’ को उसका नाम और उसका स्वभाव देती है।
कैंसर संस्थान एक ऐतिहासिक मानवीय पहल की हुई शुरुआत
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