नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन राजधानी दिल्ली छात्र आंदोलन का केंद्र बन गई। CJP के ‘संसद चलो’ मार्च को रोकने के लिए संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल, बहुस्तरीय बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरा तैनात किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़ने और कई छात्रों को हिरासत में लेने के आरोप लगाए। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने किसी भी तरह के बल प्रयोग से साफ इनकार करते हुए कहा कि पूरे प्रदर्शन को कानून के दायरे में और पेशेवर तरीके से संभाला गया।
दिनभर चले घटनाक्रम के बीच प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर तनाव देखने को मिला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंडी हाउस से संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए। शास्त्री भवन के पास हालात बिगड़ने पर आंसू गैस के इस्तेमाल और हल्के बल प्रयोग के आरोप लगे। वहीं संसद मार्ग के आसपास कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हटाया और कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया।
इस बीच समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि छात्रों के समर्थन में पहुंचीं लोकसभा सांसद डिंपल यादव और पार्टी के अन्य नेताओं को पुलिस ने रोक लिया। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का मामला बताते हुए सरकार की आलोचना की।
दिन की सबसे अहम राजनीतिक घटना तब हुई जब CJP के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से उनके आवास पर मुलाकात की। करीब 10 मिनट चली बैठक में संगठन ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। CJP प्रवक्ता सौरव दास के अनुसार, नड्डा ने मांगों पर आंतरिक स्तर पर चर्चा का आश्वासन दिया, लेकिन किसी तत्काल निर्णय की घोषणा नहीं हुई।
इसी दौरान CJP संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं, लेकिन संगठन ने बाद में स्पष्ट किया कि उन्हें न तो गिरफ्तार किया गया और न ही हिरासत में लिया गया। CJP ने कहा कि इस संबंध में फैली शुरुआती जानकारी सही नहीं थी।
सुरक्षा व्यवस्था के चलते राजीव चौक समेत कई प्रमुख दिल्ली मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद किए गए, जिससे यात्रियों और प्रदर्शनकारियों दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 पहले से लागू रही और संसद परिसर के आसपास सुरक्षा और कड़ी कर दी गई।
उधर, अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने कहा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति अब सामान्य है और उन्होंने संसद मार्च में शामिल होने के लिए अस्पताल से अस्थायी रूप से जाने की अनुमति मांगी। वहीं CJP ने स्पष्ट किया कि सरकार से बातचीत शुरू होने के बावजूद आंदोलन फिलहाल जारी रहेगा और उनकी प्रमुख मांग: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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