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CHC के पास निजी अस्पताल में नवजात की मौत:सिद्धार्थनगर में आशा बहू, डॉक्टर, जीएनएम व प्रबंधक पर मुकदमा


सिद्धार्थनगर जिले के लोटन बाजार स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई। परिजनों की शिकायत पर आशा बहू, डॉक्टर, जीएनएम और अस्पताल प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह घटना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लोटन से कुछ ही दूरी पर संचालित सदभावना हॉस्पिटल एंड फ्रैक्चर क्लीनिक में हुई। जिले में प्रसव के दौरान नवजातों की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पिछले 15 दिनों में नवजात की मौत का यह दूसरा मामला है, जिसने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और निजी अस्पतालों के संचालन पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। मृतक नवजात के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए लोटन थाने में तहरीर दी। पुलिस ने आशा बहू पुष्पा, डॉक्टर नज़रुल हसन, जीएनएम पूजा जायसवाल और अस्पताल प्रबंधक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पीड़ित हरिशंकर मौर्य ने पुलिस को बताया कि मंगलवार सुबह करीब 8 बजे वह अपनी गर्भवती बहू रूबी को प्रसव के लिए सीएचसी लोटन ले गए थे। वहां जांच और अल्ट्रासाउंड के बाद स्थिति सामान्य बताई गई, लेकिन बाद में उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि रेफर होने के बाद गांव की आशा बहू पुष्पा ने उन्हें जिला अस्पताल न ले जाकर सीधे सदभावना हॉस्पिटल एंड फ्रैक्चर क्लीनिक पहुंचा दिया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर नज़रुल हसन और जीएनएम पूजा जायसवाल ने दोबारा अल्ट्रासाउंड कराया। परिजनों के अनुसार, रात करीब 8 बजे प्रसव कराने के दौरान महिला के पेट को दबाकर जबरन डिलीवरी कराने की कोशिश की गई, जिससे गर्भ में पल रहे नवजात की मौत हो गई। परिवार का यह भी आरोप है कि बच्चे की मौत के बाद भी अस्पताल प्रशासन ने लगभग एक घंटे तक उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी और स्थिति छिपाने का प्रयास किया। छोटा ऑपरेशन किया था मामला तब और गंभीर हो गया जब परिजनों ने आरोप लगाया कि नवजात के बारे में जानकारी मांगने पर अस्पताल में मौजूद जीएनएम पूजा जायसवाल ने प्रसूता का एक छोटा ऑपरेशन भी किया था, लेकिन बच्चे की मौत के बाद वह महिला को बिना टांका लगाए ही अस्पताल छोड़कर चली गईं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने स्थिति संभालने के बजाय खुद को बचाने की कोशिश की। जब परिजनों को बच्चे की मौत की जानकारी हुई तो अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू हो गया। सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष हरिओम कुशवाहा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कराई। इस दौरान अस्पताल का अधिकांश स्टाफ मौके से गायब हो चुका था। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन से पंजीकरण संबंधी दस्तावेज मांगे जाने पर बताया गया कि सभी कागजात कार्यालय में जमा हैं और एक सप्ताह के भीतर पंजीकरण हो जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रसव के मामलों में मरीजों को निजी अस्पतालों तक पहुंचाने के बदले आशा बहुओं को चार से छह हजार रुपये तक का कमीशन मिलने की चर्चाएं आम हैं। इसी लालच में कई बार गरीब परिवार सरकारी व्यवस्था छोड़कर ऐसे निजी संस्थानों तक पहुंच जाते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोटन के अधीक्षक डॉ. अमित चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर भेजी जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। इससे पहले इटवा कस्बे के जनता सेवा हॉस्पिटल में भी प्रसव के दौरान नवजात की मौत का मामला सामने आया था। उस मामले में पुलिस मुकदमा दर्ज कर चुकी है और स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया था कि ऑपरेशन प्रवीण नामक चिकित्सक ने किया था, जबकि जांच के दौरान डॉली शर्मा नाम की महिला ने स्वयं को ऑपरेशन करने वाला बताया था। पीड़ित पक्ष ने उनकी सीडीआर, लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग भी की थी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अब तक जांच किसी अंतिम निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है।

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