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जीते हुए MLA भी नहीं बचा पाया विपक्ष! राज्यसभा चुनाव में कैसे मिली करारी हार?

देश के 10 राज्यों में सोमवार को राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव संपन्न हो गए। चुनाव में 10सों राज्य पश्चिम बंगाल, असम, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, बिहार, ओडिशा, हरियाणा और तेलंगाना शामिल रहे। इसमें से 26 उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। वहीं, बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों के लिए वोटिंग की जरूरत पड़ी। वोटिंग वाली सीटों में बिहार की 5, ओडिशा की 4 और हरियाणा की 2 सीटें शामिल हैं।

पिछले लोकसभा चुनाव में विपक्षी इंडिया अलायंस ने जिस तरह से बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को मात दी थी, वह जीत इस चुनाव से नदारद दिखी। विपक्ष में खासतौर से कांग्रेस, आरजेडी और बीजेडी के विधायक टूट गए और उन्होंने चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवारों को जीताने के लिए साथ दिया। यह एक तरह से विपक्ष के लिए तगड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी विपक्ष जो विधायक जीता था उन्होंने बीजेपी का साथ दिया।

बिहार में बीजेपी का लहराया परचम

इस चुनाव में सबसे नाटकीय घटनाक्रम बिहार और ओडिशा में देखने को मिला। यहां से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए। यहां से एनडीए ने चुनाव में बिहार की पांचों सीटों पर जीत हासिल करते हुए क्लीन स्वीप किया और विपक्ष का सफाया कर दिया। इन दोनों के अलावा केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर जद(यू), बीजेपी के शिवेश कुमार और RLM के उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं।

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आरजेडी के अमरेंद्र धारी सिंह को मिली हार

दरअसल, बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह महागठबंधन के उम्मीदवार थे। वह दूसरी बार राज्यसभा के लिए चुनाव लड़ रहे थे। मगर, महागठबंधन में तालमेल की कमी के कारण वह हार गए। कांग्रेस के तीन और आरजेडी के एक विधायक ने चुनाव में हिस्सा नहीं लेते हुए एनडीए का साथ दिया। हैरान करने वाली बात है कि महागठबंधन में शामिल नहीं रहने वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पांच और बहुजन समाज पार्टी के एक विधायक ने अपना समर्थन दिया।

अमरेंद्र धारी सिंह को जीत के लिए 41 विधायकों के विधायकों की जरूरत थी लेकिन मतदान के दिन कांग्रेस-आरजेडी के विधायक अनुपस्थित हो गए।

कांग्रेस ने यह भी घोषणा की कि वह मंगलवार को अपने प्रदेश कार्यालय के बाहर वोट चोर, विधायक चोर की नीति के विरोध में प्रदर्शन करेगी। आरजेडी के विधायक फैसल रहमान वोटिंग के दौरान गायब रहे। बाद में वह मीडिया के सामने आए।

हार के बाद तेजस्वी यादव

तेजस्वी यादव वोटिंग पूरी होने के समय के आसपास देर शाम विधानसभा पहुंचे। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘अगर हमारे कुछ विधायकों ने विश्वासघात नहीं किया होता तो हमारा उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव जीत जाता। अनुपस्थित रहने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, इस पर बाद में फैसला किया जाएगा। यह बीजेपी द्वारा धनबल और प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग का एक और उदाहरण है, जिसने कई राज्यों में इस तरह के हथकंडे अपनाए हैं।’

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वहीं, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने आरोप लगाया, ‘यह परिणाम तेजस्वी यादव के लिए करारा तमाचा है, जिन्होंने अपने विधायकों को मनाने के बजाय उन्हें एक होटल में कैद कर रखा।’

ओडिशा में भी बीजेपी का दबदबा

इसी तरह से नाटकीय घटनाक्रम ओडिशा में भी देखने को मिला। यहां की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल और कांग्रेस के कुछ विधायकों की क्रॉस-वोटिंग की। इस घटनाक्रम के बाद कड़े मुकाबले में बीजेपी ने राज्यसभा की दो सीटें जीत लीं। ओडिशा में राज्यसभा की चार सीटों के लिए चुनाव हुए, इसमें बीजेपी के वरिष्ठ नेता और ओडिशा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और सुजीत कुमार राज्यसभा चुनाव जीतने में सफल रहे। एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ने बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की।

चुनाव में ​​कई बीजेडी और कांग्रेस विधायकों की क्रॉस-वोटिंग की, जिससे बीजेपी को जीत मिली। बीजेडी के आठ विधायकों ने दिलीप राय के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की। वहीं, बीजेडी से संतृप्त मिश्रा ने जीत हासिल की। कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं लगा।

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