लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा बिजली व्यवस्था की समीक्षा बैठक के दौरान दिए गए उस महत्वपूर्ण निर्देश का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा है कि संविदा कर्मियों को नहीं हटाया जाए क्योंकि बिजली व्यवस्था को बनाए रखने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है तथा उनका सहयोग लिया जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि मात्र दो दिन पूर्व प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने भी यही निर्देश दिया था कि संविदा कर्मियों को न हटाया जाए। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन इन निर्देशों की अनदेखी करते हुए उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयाँ जारी रखे हुए है। वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग, डाउनसाइजिंग तथा तथाकथित प्रशासनिक सुधारों के नाम पर अब तक 25,000 से अधिक संविदा कर्मियों को कार्य से हटाया जा चुका है। संघर्ष समिति का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया बिजली क्षेत्र के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करने के उद्देश्य से की जा रही है।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा निजीकरण के उद्देश्य से किए जा रहे इन दमनात्मक कदमों का खामियाजा अंततः प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। पहले ही नियमित कर्मचारियों की संख्या में भारी कमी की जा चुकी है, बड़ी संख्या में पद समाप्त किए गए हैं तथा संविदा कर्मियों की संख्या भी घटा दी गई है। इसके साथ ही वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू कर बिजली व्यवस्था के समन्वित संचालन को गंभीर रूप से प्रभावित किया गया है।
संघर्ष समिति ने कहा कि वह पिछले वर्ष नवंबर माह से लगातार चेतावनी देती आ रही थी कि वर्टिकल व्यवस्था लागू करने तथा संविदा कर्मियों को हटाने से गर्मियों के दौरान बिजली व्यवस्था पर गंभीर संकट उत्पन्न होगा। दुर्भाग्यवश आज वही स्थिति प्रदेश भर में दिखाई दे रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि अभी भी समय है कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन अपनी नीतियों की समीक्षा करे। उत्पीड़न और सुधार एक साथ नहीं चल सकते। बिजली कर्मी विद्युत व्यवस्था में सुधार के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं, लेकिन भय और दमन के वातावरण में सुधारात्मक प्रयास नहीं हो सकते।
संघर्ष समिति ने मांग की है कि मार्च 2023 से अब तक बिजली कर्मियों एवं संविदा कर्मियों के विरुद्ध की गई सभी उत्पीड़नात्मक एवं प्रतिशोधात्मक कार्रवाइयों को तत्काल वापस लिया जाए, हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर लिया जाए तथा बिजली कर्मियों को विश्वास में लेकर विद्युत क्षेत्र में सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। यही प्रदेश की बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ और उपभोक्ता हितैषी बनाने का एकमात्र रास्ता है।












