श्रावस्ती में भिनगा कोतवाली में करीब छह साल पहले दर्ज एक मुकदमे में लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के तत्कालीन किसान प्रकोष्ठ अध्यक्ष मनोज कुमार पाठक, उनकी पत्नी और तीन अन्य को जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया है। न्यायालय ने पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर सभी आरोपियों को संदेह का लाभ दिया। मनोज पाठक ने स्वयं बीते बुधवार को 5:00 बजे के बीच यह जानकारी दी थी। यह मामला 2020 का है। जिसमें सभी 5 लोगों के खिलाफ धारा 195, 182 और 3/4/5 के तहत कार्रवाई की गई थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद मनोज पाठक को जेल भी भेजा गया था। इसके बाद जमानत पर सभी बाहर थे, लगभग छह साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब उन्हें राहत मिली है। सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहियों का न्यायालय ने परीक्षण किया। बचाव पक्ष ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने कथित तौर पर आरोपी बनाए गए मनोज पाठक सहित पांचों को बरी कर दिया। कोविड के दौरान प्रार्थना पत्र लेकर गए थे फैसले के बाद मनोज पाठक ने कहा कि करीब छह साल पहले उन्हें और उनके परिवार को राजनीतिक षड्यंत्र के तहत इस मुकदमे में फंसाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कोविड काल में एक पीड़िता का प्रार्थना पत्र थाने ले गया था, जिसे कथित तौर पर तत्कालीन थानाध्यक्ष ने बदलकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पाठक ने बताया कि वह न्यायालय के आदेश का अध्ययन कर रहे हैं। अध्ययन पूरा होने के बाद, वह संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ न्यायालय में मानहानि का दावा करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले के कारण उनके परिवार को काफी उत्पीड़न और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी। उन्होंने अपने आठ माह के बच्चे की मौत का भी जिक्र करते हुए कहा कि इसी मामले में उनका बच्चा भी नहीं रहा।
6 साल पुराने मुकदमे में मनोज पाठक समेत पांच बरी:श्रावस्ती में लोजपा नेता का आरोप, पुलिस ने उत्पीड़न किया, मानहानि का दावा करेंगे
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