दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्रों के आंदोलन में 20 जुलाई के बाद से कई हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। पुलिस वालों पर भी भीड़ ने हमला किया है और दिल्ली पुलिस के एक एसीपी तो गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने बताया कि उग्र भीड़ पुलिस को टारगेट करके प्रदर्शन कर रही है। बिहार के बेगूसराय में में भी छात्रों ने पुलिस पर हमला किया। इस मामले में पुलिस ने अब तक कई गिरफ्तारियां कर ली हैं। पुलिस जनता की सेवा और सुरक्षा के लिए है और पुलिस की सुरक्षा के लिए भी कानून में प्रावधान हैं। अगर कोई पुलिस पर हमला करता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
किसी भी पुलिसकर्मी पर हमला करना या उसे सरकारी ड्यूटी करने से रोकना केवल एक सामान्य अपराध नहीं माना जाता, बल्कि भारतीय कानून में इसे लोक सेवक के कामकाज में बाधा डालने का गंभीर अपराध माना गया है। 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) में ऐसे मामलों के लिए अलग-अलग धाराएं और सजा के प्रावधान किए गए हैं। यदि हमला गंभीर हो, चोट पहुंचे, दंगा हो या जानलेवा हमला किया जाए, तो एक साथ कई धाराओं में मामला दर्ज हो सकता है।
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ड्यूटी से रोकने के लिए हमला या बल प्रयोग
अगर कोई व्यक्ति किसी पुलिसकर्मी या अन्य लोक सेवक को उसकी वैध सरकारी ड्यूटी करने से रोकने के लिए हमला करता है या आपराधिक बल का प्रयोग करता है, तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 132 लागू होती है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को 2 साल तक की कैद या जुर्माना या फिर दोनों हो सकते हैं। यह धारा तब भी लागू हो सकती है जब हमला सरकारी काम का बदला लेने की नीयत से किया गया हो।
पुलिसकर्मी को चोट पहुंचाने पर
अगर पुलिसकर्मी को सरकारी ड्यूटी के दौरान जानबूझकर चोट या गंभीर चोट पहुंचाई जाती है, तो केवल धारा 132 ही नहीं, बल्कि धारा 121 भी लग सकती है। चोट की प्रकृति के आधार पर सजा और गंभीर हो सकती है। कई मामलों में अन्य गंभीर धाराएं भी साथ में जोड़ी जाती हैं।
सरकारी काम में बाधा डालना
यदि कोई व्यक्ति पुलिसकर्मी या किसी अन्य लोक सेवक को उसके सरकारी काम करने से रोकता है, रास्ता रोकता है या जानबूझकर बाधा पहुंचाता है, तो धारा 221 लागू होती है। इसके तहत अधिकतम 3 महीने की कैद, 2500 रुपये जुर्माना या फिर दोनों हैं। यह धारा उन मामलों में लगती है, जहां सरकारी कार्य में बाधा डाली जाती है, भले ही हमला न किया गया हो।
दंगे के दौरान पुलिस पर हमला
आणतौर पर दंगों या प्रदर्शनों में पुलिस को निशाना बनाना काफी आसान होता है और लोग पुलिस को टारगेट भी करते हैं। अगर कोई व्यक्ति दंगा, हिंसक भीड़ या गैरकानूनी जमावड़े को कंट्रोल करने के दौरान पुलिस या अन्य लोक सेवक पर हमला करता है या उसे रोकता है, तो धारा 195 BNS लागू होती है। इसके तहत 3 साल तक की सजा या फिर कम से कम 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा दोनों सजाएं एक साथ भी हो सकती हैं।
दंगे या भीड़ में हिंसा में कौन सी धाराएं लगेंगी?
अगर पुलिस पर हमला भीड़ करती है, तो कई अन्य धाराओं में भी केस दर्ज किया जा सकता है। केस के तथ्यों के अनुसार, धारा 190 (गैरकानूनी जमावड़ा), धारा 191 (दंगा), धारा 1991 (3) (घातक हथियार के साथ दंगा), धारा 351(2) (आपराधिक धमकी) में केस दर्ज हो सकता है। इसके अलावा अगर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा हो तो सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 (Prevention of Damage to Public Property Act) के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
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यदि पुलिसकर्मी पर हमला साधारण मारपीट तक सीमित न होकर गंभीर चोट पहुंचाने, जानलेवा हथियार इस्तेमाल करने या हत्या के प्रयास जैसा हो, तो BNS की संबंधित गंभीर धाराएं भी जोड़ी जाती हैं। ऐसे मामलों में सजा कई सालों तक की हो सकती है और अपराध की परिस्थितियों के आधार पर अदालत फैसला करती है।
एक साथ कई धाराओं में दर्ज हो सकते हैं केस
कानूनी एक्सपर्ट्स के अनुसार, पुलिस पर हमला होने के मामलों में केवल एक धारा नहीं लगती। घटना की प्रकृति के आधार पर हमला, चोट, दंगा, सरकारी कार्य में बाधा, धमकी, गैरकानूनी जमावड़ा और सरकारी संपत्ति को नुकसान जैसी कई धाराएं एक साथ लग सकती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में सजा कहीं ज्यादा हो सकती है। पुलिस किन धाराओं में केस दर्ज करती है और कोर्ट में किन धाराओं में दोषी ठहराया जाता है सजा इस बात पर निर्भर करती है।












