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रूस बोला- नाटो से युद्ध नहीं चाहता, लेकिन ‘न्यूक्लियर शील्ड’ यूरोप के लिए खतरा

बर्लिन। रूस ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उसका नाटो या जर्मनी के साथ युद्ध करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन यूरोप में “संयुक्त परमाणु सुरक्षा कवच” यानी न्यूक्लियर शील्ड पर बढ़ती चर्चाएं महाद्वीप की रणनीतिक स्थिति को बदल सकती हैं।

जर्मनी में रूस के राजदूत सर्गेई नेचायेव ने बर्लिन में आयोजित एक चर्चा कार्यक्रम के दौरान यह बयान दिया। नेचायेव ने कहा कि हाल के समय में यूरोप में साझा परमाणु सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार बातचीत हो रही है और यह कोई साधारण मुद्दा नहीं है।

उनके मुताबिक, यदि यूरोप में परमाणु खतरे का विस्तार होता है, तो रूस को अपनी परमाणु नीति और सुरक्षा सिद्धांतों को फिर से सामने रखना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि रूस नाटो या जर्मनी के साथ किसी भी तरह का युद्ध नहीं चाहता, लेकिन यदि उसके खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ाने की कोशिश हुई, तो हालात गंभीर हो सकते हैं।

राजदूत ने आरोप लगाया कि यूरोप में आम लोगों तक यह संदेश पहुंचाया जा रहा है कि रूस एक बड़ा खतरा है और उसे रणनीतिक रूप से कमजोर करना जरूरी है।

नेचायेव ने कहा कि यूक्रेन को लगातार हथियार, ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलें दिए जाने से तनाव और बढ़ रहा है। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पहले जैसी नहीं रह जाएगी।

इस बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी मॉस्को में विजय दिवस परेड के दौरान कहा कि रूसी सैनिक यूक्रेन में नाटो समर्थित “आक्रामक ताकत” का सामना कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी देशों के समर्थन के बावजूद रूसी सेना अपने अभियान में आगे बढ़ रही है।

रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच यूरोप में सुरक्षा, परमाणु नीति और सैन्य संतुलन को लेकर बहस और तेज हो गई है।

 

 

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