श्रावस्ती में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की इकाई ने बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन जिलाधिकारी के नामित प्रतिनिधि संजय कुमार को दिया गया। इसमें आरटीई अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट देने की मांग की गई है। महासंघ के जिलाध्यक्ष नीलमणि शुक्ला ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद आरटीई अधिनियम 2010 लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों की नियुक्ति के समय वे सभी तत्कालीन न्यूनतम योग्यताएं पूरी करते थे। केंद्र सरकार द्वारा 9 अगस्त 2017 को किए गए संशोधन के जरिए सभी शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करना भूतलक्षी नियम लागू करने जैसा है, जिसे न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। टीईटी से छूट प्रदान करने की मांग नीलमणि शुक्ला ने जानकारी दी कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर देशभर के सभी जिलों में एक साथ यह ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। ज्ञापन के माध्यम से विधायी हस्तक्षेप कर आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट प्रदान करने की मांग की गई है। जिलाध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि संगठन की मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 को आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को पहले छूट दी गई थी, लेकिन बाद में हुए संशोधन से शिक्षकों के साथ ‘छलावा’ हुआ है। इस ज्ञापन कार्यक्रम में प्रकाश चंद मिश्रा, राजकुमार सिंह चौहान, प्रदीप पटेल, दीपक केसरवानी, जीतेंद्र द्विवेदी, अजय वर्मा, कर्मवीर राणा, रणविजय प्रकाश मिश्रा, कृष्ण कुमार मिश्रा, सुभाष पटवा, आकांक्षा, प्रतिभा, पल्लवी सरकार, सौरभ मिश्रा, रमेश मिश्रा, शिवकुमार मिश्र और सुमित सहित सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे।
श्रावस्ती आरटीई पूर्व नियुक्त शिक्षकों ने टीईटी में छूट मांगी:राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
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