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  • ‘बातों पर भरोसा नहीं…’, ट्रंप के वादों को बार-बार खारिज क्यों कर रहा ईरान?

    ‘बातों पर भरोसा नहीं…’, ट्रंप के वादों को बार-बार खारिज क्यों कर रहा ईरान?

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अपनी टीम के साथ बैठक की है। इस बैठक में ईरान के साथ युद्धविराम बढ़ाने और समझौते पर अंतिम फैसला लेना था। बैठक खत्म होने के बाद कोई साफ और प्रभावी फैसला नहीं आया। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु बम नहीं बनाना चाहिए।

    डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि दोनों तरफ से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला होना चाहिए और वहां लगे किसी भी माइन्स को नष्ट कर दिया जाएगा।

    गुरुवार को दोनों देशों के बीच एक प्रारंभिक समझौता हुआ था। इसमें 60 दिन का युद्धविराम बढ़ाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव था। लेकिन इसे अभी दोनों देशों के नेताओं की मंजूरी मिलनी बाकी है।

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    ट्रंप की बैठक का हल क्या निकला?

    डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका हार्मुज स्ट्रेट पर लगी रोक हटा सकता है, ताकि फंसे जहाज घर वापस जा सकें। उन्होंने ईरान से अपना संवर्धित यूरेनियम अमेरिका को सौंपने और नष्ट करने को भी कहा। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि फिलहाल कोई पैसे का लेन-देन नहीं होगा।

    ‘ट्रंप की बात आधी सच, आधी झूठ’

    ईरान ने इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ट्रंप के बयान में आधी सच्चाई और आधी झूठ है। ईरान का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम पर कोई बातचीत नहीं हो रही है। उनका फोकस सिर्फ युद्ध खत्म करने पर है।

    जेडी वेंस क्या कह रहे हैं?

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि दोनों पक्ष बहुत करीब हैं, लेकिन अभी पूरी तरह समझौता नहीं हुआ है। कुछ शब्दों और यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर बात चल रही है।

    ईरान को भरोसा क्यों नहीं?

    ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबफ ने कहा, ‘हम शब्दों या गारंटी पर भरोसा नहीं करते, सिर्फ कार्रवाई पर भरोसा करते हैं।’

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    ईरान ने साफ किया है कि डोनाल्ड ट्रंप का रुख भरोसेमंद नहीं है। उन्होंने सीज फायर का एलान किया लेकिन हमले जारी रखे। होर्मुज को ब्लॉक उन्होंने किया है। उनके थोपे हमलों की सजा दुनिया भुगत रही है। ईरान किसी भी हाल में यूरेनियम, अमेरिका को नहीं सौंपना चाहता है, ट्रंप की नजरें सिर्फ ईरान के संवर्धित यूरेनियम पर हैं।

    8 अप्रैल से लागू सीज फायर लेकिन स्थितियां तनावपूर्ण

    28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमला किया। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया है, जिससे दुनियाभर में तेल की कीमतें बढ़ गईं हैं। दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन दोनों पक्ष एक-दूसरे पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं।

  • मनमोहन झा के तीखे बोल, ‘ओवैसी को छोड़िए, उनके सिपाही के बराबर भी नहीं!’

    मनमोहन झा के तीखे बोल, ‘ओवैसी को छोड़िए, उनके सिपाही के बराबर भी नहीं!’

    • पुराने बयान पर पलटवार, फॉलोअर्स की तुलना से गरमाई राजनीति

    गाजियाबाद। गाजियाबाद की सियासत में उस समय हलचल तेज हो गई जब AIMIM शहर अध्यक्ष मनमोहन झा गामा ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता नासिमुद्दीन सिद्दीकी को लेकर सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोल दिया। एक पुराने बयान का हवाला देते हुए गामा ने न सिर्फ सियासी कटाक्ष किया, बल्कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता की तुलना कर नई बहस को जन्म दे दिया।

    ‘कौन ओवैसी?’ वाले बयान को बनाया निशाना

    दरअसल, AIMIM नेता मनमोहन झा गामा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने अपनी प्रोफाइल और नासिमुद्दीन सिद्दीकी के सोशल मीडिया फॉलोअर्स की तुलना दिखाई। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि बदलते दौर में जनता का समर्थन और डिजिटल लोकप्रियता भी राजनीति का बड़ा पैमाना बन चुकी है।

    गामा ने दावा किया कि नासिमुद्दीन सिद्दीकी ने कभी AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को लेकर कहा था — ‘कौन ओवैसी, मैं नहीं जानता और कहां रहता है, यह भी नहीं पता।’ इसी कथित बयान को आधार बनाकर गामा ने पलटवार करते हुए कहा कि अब जनता खुद फर्क समझ रही है।

    ‘ओवैसी साहब देश-दुनिया में पहचाने जाते हैं’

    मनमोहन झा गामा ने तीखे अंदाज में कहा, ‘ओवैसी साहब को छोड़िए, आप तो उनके सिपाही के बराबर भी नहीं हैं। जिस नेता की स्पीच लाखों लोग सुनते हों, जिन्हें देश-दुनिया जानती हो, उनके बारे में इस तरह की बातें करना जनता को स्वीकार नहीं।’

    उन्होंने आगे कहा कि बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी केवल एक राजनीतिक चेहरा नहीं, बल्कि उन लोगों की आवाज हैं जो अपने अधिकारों और मुद्दों की राजनीति चाहते हैं। गामा के मुताबिक, ओवैसी की सभाओं में उमड़ने वाली भीड़, सोशल मीडिया पर उनकी मजबूत पकड़ और राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान इस बात का प्रमाण है कि वे देश के बड़े नेताओं में शुमार हो चुके हैं।

    ‘ओवैसी राजनीति के कोहिनूर’ — गामा

    AIMIM शहर अध्यक्ष ने ओवैसी को ‘राजनीति का कोहिनूर’ बताते हुए कहा कि कुछ लोग उनकी लोकप्रियता को नजरअंदाज करने की कोशिश करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि आज उनके भाषण सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सुने जाते हैं।

    गामा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर समर्थकों और विरोधियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए ऐसे बयान आने वाले दिनों में और सियासी गर्मी बढ़ा सकते हैं।

  • क्या बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबरी का हक है? सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दूर किया बड़ा भ्रम

    क्या बेटियों को पिता की संपत्ति में बराबरी का हक है? सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दूर किया बड़ा भ्रम

    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने पिता की संपत्ति में बेटियों के अधिकार को लेकर एक बेहद अहम और दूरगामी फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि यदि पिता की मृत्यु बिना वसीयत के होती है, तो बेटियां भी संपत्ति में बराबर की हकदार होंगी, भले ही बेटों ने पहले ही आपस में संपत्ति का बंटवारा क्यों न कर लिया हो। 

    शीर्ष अदालत का यह फैसला उन हजारों महिलाओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन्हें पारिवारिक संपत्ति में अक्सर उनके अधिकार से वंचित कर दिया जाता है।यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने सुनाया। अदालत ने कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत बेटी ‘क्लास-1 वारिस’ होती है और उसे पिता की संपत्ति में बेटों के बराबर अधिकार प्राप्त है।

    क्या था पूरा मामला?

    मामला कर्नाटक के निवासी बीएम सीनप्पा के परिवार से जुड़ा था। सीनप्पा की वर्ष 1985 में बिना वसीयत के मृत्यु हो गई थी। उनके पीछे पत्नी, तीन बेटियां और चार बेटे थे। पिता की मौत के बाद बेटों ने पहले मौखिक रूप से और फिर वर्ष 2000 में रजिस्टर्ड दस्तावेज के जरिए संपत्ति का बंटवारा कर लिया। आरोप है कि इस बंटवारे में तीनों बेटियों को शामिल ही नहीं किया गया और उन्हें कोई हिस्सा नहीं दिया गया।
    इसके बाद वर्ष 2007 में बेटियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और कहा कि पिता की मृत्यु बिना वसीयत हुई थी, इसलिए हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 8 के तहत वे भी बराबर की हिस्सेदार हैं।

    हाईकोर्ट ने क्यों खारिज किया था दावा?

    भाइयों ने अदालत में दलील दी कि संपत्ति का बंटवारा वर्ष 2000 में हो चुका था, यानी 20 दिसंबर 2004 से पहले, इसलिए यह धारा 6(5) के तहत सुरक्षित है। इसी आधार पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने बेटियों का दावा खारिज कर दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

    सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को गलत बताते हुए कहा कि धारा 6(5) केवल पुराने बंटवारों को 2005 के संशोधन के प्रभाव से बचाती है, लेकिन इससे बेटियों का उत्तराधिकार का मूल अधिकार खत्म नहीं हो जाता।अदालत ने स्पष्ट किया कि बेटी का अधिकार केवल जन्म से मिलने वाले कॉपार्सनरी अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने पिता की संपत्ति में क्लास-1 उत्तराधिकारी के रूप में भी बराबर की हिस्सेदार है।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यह तय करना कि पुराना बंटवारा वैध था या नहीं और क्या वह बेटियों पर लागू होता है, यह एक तथ्यात्मक विवाद है, जिसकी जांच ट्रायल कोर्ट में सबूतों के आधार पर होगी।

    हाईकोर्ट का आदेश रद्द, मामला फिर ट्रायल कोर्ट भेजा

    शीर्ष अदालत ने अंत में कर्नाटक हाईकोर्ट के पुराने आदेश को रद्द कर दिया और मामले को दोबारा ट्रायल कोर्ट भेज दिया। साथ ही निर्देश दिया कि जब तक सुनवाई पूरी न हो, संपत्ति की वर्तमान स्थिति में कोई बदलाव न किया जाए।कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को और मजबूत करेगा तथा पारिवारिक संपत्ति विवादों में बेटियों की स्थिति को कानूनी सुरक्षा प्रदान करेगा।

  • सैकड़ों करोड़ का मुनाफा, पेपर कराने में बार-बार फेल, चौतरफा घिरी NTA की कहानी

    सैकड़ों करोड़ का मुनाफा, पेपर कराने में बार-बार फेल, चौतरफा घिरी NTA की कहानी

    मेडिकल एंट्रेंस परीक्षा NEET (UG) 2026 का पेपर लीक होने और फिर परीक्षा रद्द होने के कारण राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) इन दिनों चर्चा में है। 250 से ज्यादा परीक्षाएं सफलतापूर्वक कराने का दावा करने वाली यह एजेंसी सिर्फ 8 साल पुरानी है लेकिन दो बार तो NEET (UG) का ही पेपर लीक हो चुका है। इंजीनियरिंग, मेडिकल, यूनिवर्सिटी एडमिशन, रिसर्च संस्थानों में एडमिशन और देश के कई अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में एडमिशन के लिए परीक्षा आयोजित कराने वाली यह एजेंसी सिर्फ 8 साल में सैकड़ों करोड़ का मुनाफा कमाने वाली एजेंसी तो बनी है लेकिन कई घटनाओं ने यह साबित किया है कि वह लोगों का भरोसा नहीं कमा पाई है।

    बीते कुछ साल में NEET (UG) के अलावा, UGC (NET) 2024, JEE Mains 2024, UGC (NET) 2021 और JEE Mains 2020 जैसी परीक्षाएं प्रभावित हुई हैं। ये सभी परीक्षाएं NTA ने आयोजित की थीं और इससे कम से कम 75 लाख छात्र-छात्राएं प्रभावित हुई हैं। अगर NTA की ओर से कराई गई परीक्षाओं में बैठे कुल छात्रों की संख्या देखें तो पता चलता है कि अब तक लगभग 13.6 प्रतिशत छात्र NTA की ओर से आयोजित परीक्षाओं के चलते प्रभावित हुए हैं।

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    साल 2018 में सिर्फ 25 करोड़ रुपये के ग्रांट के साथ शुरू हुई यह एजेंसी अब मुनाफा कमा रही है। अगस्त 2024 में संसद में दिए गए एक जवाब से पता चला था कि NTA ने पहले ही साल यानी 2018-19 में कुल 101.51 करोड़ रुपये इन परीक्षाओं के फॉर्म की फीस से कमाए थे। पहले साल उसके 118.43 करोड़ रुपये खर्च हुए और उसे थोड़ा सा नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि, अगले ही साल से जितने पैसे फॉर्म की फीस से मिले, उससे कम खर्च में परीक्षाओं का आयोजन करा लिया गया।

    कितने लोग चलाते हैं NTA?

    NTA को चलाने वाली एक गवर्निंग बॉडी है जिसके एक चेयरमैन होते हैं। इस पद पर पूर्व अधिकारियों या विद्वानों को नियुक्त किया जाता है। मौजूदा समय में रिटायर्ड प्रोफेसर प्रदीप कुमार जोशी NTA के चेयरमैन हैं जो पहले UPSC के चेयरमैन हैं। वरिष्ठ IAS अधिकारी अभिषेक सिंह NTA के डायरेक्टर जनरल (DG) हैं। इसके अलावा, ती IITs के डायरेक्टर, दो NITs के डायरेक्टर, IIMs के दो डायरेक्टर और कई अन्य चर्चित शैक्षणिक संस्थानों के मुखिया इस गवर्निंग बॉडी के सदस्य हैं।

    22 जुलाई 2024 को DMK सांसद के कनिमोई ने लोकसभा में NTA के स्थायी और अस्थायी स्टाफ को लेकर सवाल पूछे थे। इस सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने जवाब दिया था। इस जवाब में उन्होंने बताया था कि NTA के निदेशक को केंद्र सरकार नियुक्त करती है और अन्य अधिकारी डेप्युटेशन पर नियुक्त किए जाते हैं। 22 जुलाई 2024 को मिली जानकारी के मुताबिक, NTA में कुल 22 कर्मचारी ऐसे थे जो डेप्युटेशन पर तैनात किए गए थे। वहीं, कॉन्ट्रैक्ट पर कुल 39 कर्मचारी तैनात थे और कुल 132 कर्मचारी ऐसे थे जिनसे आउटसोर्सिंग के जरिए काम लिया जा रहा था।

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    एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव पर क्या हुआ?

    पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर NTA पर पहले भी सवाल उठे हैं। यही वजह थी कि 22 जून 2024 को शिक्षा मंत्रालय ने एक हाई लेवल कमेटी ऑफ एक्सपर्ट्स (HLCE) बनाई और इस कमेटी ने 21 अक्तूबर 2024 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। कमेटी ने सिफारिश की थी कि पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए नेशनल कॉमन एंट्रेंस टेस्टिंग में बदलाव करना होगा। इस कमेटी की सिफारिशें कितनी लागू हुईं, यह देखने के लिए ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. के राधाकृषणन की अगुवाई में एक अलग कमेटी बनाई गई।

    शिक्षा मंत्रालय ने संसद में बताया कि NTA को मजबूत करने के लिए 16 नए पद बनाए गए। इसके लिए 8 डायरेक्टर और 8 ज्वाइंट डायरेक्टर नियुक्त किए जाने हैं।

    कितनों की परीक्षा ले चुका NTA?

    साल 2018 में बनी NTA का मकसद उच्च शिक्षण संस्थानों में एडमिशन के लिए होने वाली परीक्षाएं कराना है। मार्च 2026 में राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास के एक सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने बताया था कि 11 मार्च 2026 तक NTA ने 275 से ज्यादा परीक्षाएं कराईं जिनमें कुल 6.61 करोड़ से ज्यादा अभ्यर्थी बैठे। इस जवाब में भी 16 नए पद बनाने की बात दोहराई गई। हालांकि, यह स्पष्टता नहीं है कि इन पदों पर किसी की नियुक्ति की गई या नहीं।

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    साल दर साल परीक्षाओं के आयोजन और उनके फॉर्म की फीस से होने वाली कमाई में इजाफा होता गया है। इसी अनुपात में खर्च भी बढ़ा है। साल 2024 के अगस्त महीने में राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के एक सवाल के जवाब से पता चलता है कि साल 2023-24 में NTA ने स्टूडेंट्स के फॉर्म की फीस से लगभग 1065 करोड़ रुपये कमाए और 1020 करोड़ रुपये खर्च किए।

    इसी तरह 2022-23 में 873.20 करोड़, 2021-22 में 490.35 करोड़, 2020-21 में 494.46 करोड़ और 2019-20 में 488.08 करोड़ रुपये फीस से इकट्ठा हुए। 2018-19 को छोड़कर हर साल कमाई गए पैसों से कम खर्च करके ही परीक्षाओं का आयोजन किया गया।

  • बार-बार उखड़ रहे कृत्रिम कूल्हे का सफल ऑपरेशन:बस्ती के ओपेक हॉस्पिटल कैली में डॉक्टरों ने दी मरीज को राहत

    बार-बार उखड़ रहे कृत्रिम कूल्हे का सफल ऑपरेशन:बस्ती के ओपेक हॉस्पिटल कैली में डॉक्टरों ने दी मरीज को राहत

    #बस्ती_न्यूज

    बस्ती के महार्षि वशिष्ठ स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज की चिकित्सा इकाई ओपेक हॉस्पिटल कैली के ऑर्थोपेडिक विभाग में एक मरीज के बार-बार उखड़ रहे कृत्रिम कूल्हे का जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया। नगर बाजार के बक्सर गांव के रहने वाले दुखराम पुत्र मूसे के दाहिने और बाएं कूल्हे में तेज दर्द, पैर में विकृति, छोटापन और कूल्हे की गतियों में कमी की शिकायत के साथ अस्पताल में भर्ती हुए थे। जानकारी के अनुसार, दुखराम को करीब डेढ़ वर्ष पहले फीमर नेक फ्रैक्चर (जांघ की हड्डी के ऊपरी हिस्से का फ्रैक्चर) हुआ था। तब एक निजी अस्पताल में बाइपोलर हेमीआर्थ्रोप्लास्टी ऑपरेशन किया गया था। लगभग एक वर्ष बाद, मरीज को दोबारा चोट लगने के बाद ऑपरेटेड कूल्हे में जटिलताएं उत्पन्न हो गईं, जिसके बाद टोटल हिप रिप्लेसमेंट (टीएचआर) की रिवीजन सर्जरी की गई। इस रिवीजन सर्जरी के लगभग 20 दिन बाद भी कृत्रिम कूल्हा फिर से डिसलोकेट हो गया, जिसके बाद ओपन रिडक्शन प्रक्रिया की गई। इसके बावजूद, करीब 10 दिन बाद कूल्हा दोबारा उखड़ गया। इस लगातार हो रही गंभीर समस्या के कारण मरीज को ओपेक हॉस्पिटल कैली के हड्डी विभाग में भर्ती कराया गया। आर्थोपेडिक टीम ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए एक और सफल ऑपरेशन किया। वर्तमान में मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है। यह जटिल ऑपरेशन आर्थोपेडिक विशेषज्ञ एवं विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार श्रीवास्तव ने किया, जिसमें डॉ. अविनाश ने सहयोग प्रदान किया। बेहोशी की जिम्मेदारी डॉ. अभिषेक बरनवाल ने संभाली, जिसमें डॉ. वार्तिका ने सहयोग किया। यह जानकारी उपप्रधानाचार्य डॉ. अनिल यादव ने दी। प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने इस जटिल मामले के सफल प्रबंधन पर पूरी चिकित्सा टीम को बधाई दी।
    #बस्ती न्यूज़ टुडे

  • वर्ली कोलीवाड़ा में बार-बार बिजली गुल

    वर्ली कोलीवाड़ा में बार-बार बिजली गुल

    वर्ली कोलीवाड़ा इलाके के लोग पिछले एक महीने से बार-बार और अनियमित बिजली कटौती से परेशान हैं। खासकर पिछले तीन दिनों से हर रात पांच घंटे से ज़्यादा बिजली गुल होने से लोगों में बहुत गुस्सा है।(Worli Koliwada residents in Mumbai face repeated night-long power cuts)

    कई बार की शिकायत

    स्थानीय लोगों ने बार-बार बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट और नगर निगम प्रशासन से शिकायत की है। हालांकि, लोगों का आरोप है कि उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है। अधिकारियों से साफ जानकारी न मिलने से लोगों की चिंता बढ़ गई है।

    कंस्ट्रक्शन से बिजली सिस्टम पर और ज़्यादा दबाव

    इस बीच, स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि इलाके में हो रहे बिना इजाज़त के कंस्ट्रक्शन से बिजली सिस्टम पर और ज़्यादा दबाव पड़ रहा है। रहने वाले शरद कोली ने कहा कि बिना इजाज़त के कंस्ट्रक्शन से पुरानी वायरिंग और कनेक्शन पर और ज़्यादा दबाव पड़ रहा है, जिससे बिजली सप्लाई में दिक्कत आ रही है।

    टेक्निकल खराबी

    इस पर वर्ली में BEST डिवीजन के डिप्टी इंजीनियर ने कहा कि दो अलग-अलग जगहों पर टेक्निकल खराबी मिली थी। रिपेयर के काम के लिए कुछ समय के लिए बिजली सप्लाई बंद करनी पड़ी थी। लगातार तीन दिनों तक बिजली गुल रही। हालांकि उन्होंने इस दावे से इनकार किया, लेकिन मिड डे से बातचीत में माना कि गर्मियों में ज़्यादा इस्तेमाल और कंस्ट्रक्शन की वजह से लाइन पर लोड बढ़ गया है।

    स्थानीय वैभव वारलीकर ने कहा कि रात में बिजली चले जाने से आराम करना मुश्किल हो जाता है। वहीं थॉमस डिसूज़ा ने शिकायत की कि उन्हें BEST ऑफिस से सही जवाब नहीं मिल रहा है और उन्हें बार-बार अधिकारियों के पास जाना पड़ रहा है।

    इस बीच, गुस्साए नागरिकों ने भी इस समस्या की वजह से विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है और प्रशासन से तुरंत ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।

    यह भी पढ़ें- मुंबई और ठाणे के बीच रेल यात्रा ने 175 वर्ष पूरे किए

  • बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई

    बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई

    केंद्र सरकार ने बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर रोक लगाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 के तहत सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 में तीसरा अमेंडमेंट करके सेंट्रल मोटर व्हीकल्स (थर्ड अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 लागू किए गए हैं और ये नियम 20 जनवरी, 2026 से लागू हो गए हैं।(Strict action against repeat traffic violators)

    एक साल में पांच या उससे ज़्यादा बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों पर गंभीर जुर्म के तौर पर कार्रवाई

    नए अमेंडमेंट के मुताबिक, 1 जनवरी, 2026 से, एक साल में पांच या उससे ज़्यादा बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों पर गंभीर जुर्म के तौर पर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, यह साफ तौर पर कहा गया है कि पिछले साल के वायलेशन अगले साल में नहीं गिने जाएंगे।ई-चालान सिस्टम को और ज़्यादा ट्रांसपेरेंट और डिजिटल बनाने पर भी ज़ोर दिया गया है। पुलिस अधिकारी या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी सीधे या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से चालान जारी कर सकेंगे। साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग सिस्टम के ज़रिए ऑटोमैटिक चालान जारी करने की सुविधा भी दी गई है। फिजिकल चालान 15 दिनों के अंदर संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाना ज़रूरी किया गया है, जबकि ई-चालान 3 दिनों के अंदर संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाना ज़रूरी किया गया है।

    45 दिनों के अंदर जुर्माना भरना होगा

    चालान मिलने के बाद, संबंधित व्यक्ति को 45 दिनों के अंदर जुर्माना भरना होगा या ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ चालान को चैलेंज करना होगा। अगर तय समय में चैलेंज नहीं किया जाता है या चैलेंज खारिज हो जाता है, तो अगले 30 दिनों के अंदर पूरा जुर्माना भरने या 50 परसेंट रकम जमा करके कोर्ट में अर्जी देने का नियम है। अगर उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो चालान स्वीकार माना जाएगा और अगले 15 दिनों के अंदर पूरा जुर्माना भरना होगा।

    इसके अलावा, अगर चालान स्वीकार करने के बाद भी जुर्माना नहीं भरा जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को रोज़ाना इलेक्ट्रॉनिक नोटिफिकेशन भेजा जाएगा। अगर फाइन की रकम बाकी है, तो उस व्यक्ति के ड्राइविंग लाइसेंस या गाड़ी के रजिस्ट्रेशन से जुड़े किसी भी एप्लीकेशन पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। पेंडिंग मामलों में, गाड़ी या लाइसेंस पर ‘Not to be Transacted’ का निशान लगा दिया जाएगा। गंभीर उल्लंघन के मामलों में, अधिकारियों को कोर्ट के आदेश के अनुसार गाड़ी ज़ब्त करने का अधिकार दिया गया है।

    इस बीच, पेंडिंग ई-चालान के मामलों को संबंधित रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस के ज़रिए रेगुलर तौर पर सुलझाया जा रहा है और ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ऑफिस, मुंबई ने लोगों से समय पर फाइन भरने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की है।

    यह भी पढ़ें- मुंबई की लोकल ट्रेनों में फेरीवालों को फिर से इजाज़त?

  • बार-बार मैग्नीशियम की गोली खाना हार्ट और किडनी के लिए खतरनाक, समझिए कैसे?

    हमारे शरीर के लिए विटामिन्स और मिनरल्स बहुत जरूरी होते हैं। भारत में 60% से ज्यादा लोग मैग्नीशियम की कमी से जूझ रहे हैं। National Library Of Medicine की रिपोर्ट में यह स्टडी पब्लिश हुई है। मैग्नीशियम एक जरूरी सप्लीमेंट्स है जो शरीर में 300 से ज्यादा एंजाइम्स को बांधने का काम करता है। ये आपके मसल्स, नर्वस सिस्टम और हार्ट के लिए जरूरी है। साथ ही आपके ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। इसके अलावा हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।

    आज कल लोग विटामिन्स और मिनरल्स की टैबलेट्स बिना डॉक्टर की सलाह के खाने लगते हैं। इसकी वजह से आपके हृदय, किडनी समेत अन्य अंगों पर प्रभाव पड़ता है। मैग्नीशियम को अगर अधिक मात्रा में लेते हैं तो सेहत के लिए कितना खतरनाक है? किन चीजों में मैग्नीशियम पाया जाता है और कितनी मात्रा में लेना चाहिए। हमने इस बारे में न्यूट्रीप्लस की डायरेक्टर और सीनियर क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉक्टर अंजलि फाटक से बात की।

    यह भी पढ़ें: हर बार एसिडिटी में गोली? न्यूट्रीशन पर पड़ सकता असर

    ज्यादा मात्रा में मैग्नीशियम लेने से क्या नुकसान होता है?

    अगर आप मैग्नीशियम को ज्यादा मात्रा में लेते हैं तो सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। एक व्यक्ति को हर दिन 350 माइक्रोग्राम लेना चाहिए। इसमें भी जो महिलाएं हैं उन्हें 310 से 320 माइक्रोग्राम लेना चाहिए। पुरुष को प्रति दिन 400 माइक्रोग्राम से ज्यादा मैग्नीशियम नहीं लेना चाहिए। अगर आप जरूरत से ज्यादा मैग्नीशियम की टैबलेट्स लेते हैं तो पेट में दर्द, पेट में ऐंठन, उल्टी, मितली की समस्या हो सकती है।

    हृदय पर पड़ता है प्रभाव

    मैग्नीशियम की मात्रा ज्यादा होने से ब्लड प्रेशर कम होने लगाता है। इसकी वजह से चक्कर आने लगता है। इसके अलावा हृदय पर भी प्रभाव पड़ता है। अनियमित हार्ट बीट का खतरा बढ़ जाता है।

    किडनी पर दबाव बढ़ता है

    मैग्नीशियम की मात्रा ज्यादा होने की वजह से किडनी पर प्रभाव पड़ता है। कई लोग बिना डॉक्टर को दिखाए मैग्निशियम खाते रहते हैं जिसकी वजह से मसल्स कमजोर हो जाती है, सांस लेने में दिक्कत होती है। इस सब कारणों से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

    मैग्नीशियम की कमी से दिखते हैं ये लक्षण

    • लगातार थकान
    • तनाव या घबराहट
    • बेचैनी
    • नींद ठीक से न आना
    • मांसपेशियों में खिंचाव (क्रैम्प्स)
    • चिंता

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    किन लोगों के लिए खतरनाक है ज्यादा मैग्नीशियम?

    • लो बीपी की समस्या
    • किडनी या हार्ट संबंधी बीमारियां
    • हाइपरेटेंशन
    • जो लोग ड्यूरेटिक की दवा लेते हैं।
    • प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए खतरनाक है।

    कौन सा टेस्ट करवाएं?

    अगर मैग्नीशियम की कमी है तो कितनी कमी है? इसके लिए आपको सीरम मैग्नीशियम टेस्ट करवाना पड़ेगा। ये टेस्ट बताता है कि ब्लड में मैग्नीशियम का कितना लेवल है। इस टेस्ट के हिसाब से डॉक्टर आपको सलाह देता है कि आपका खानपान बदलने से ठीक हो जाएगा। क्या सप्लीमेंट्स लेने पड़ेंगे या फिर इंजेक्शन की जरूरत है। कितने दिनों तक दवा चलेगी? इन सभी चीजों के बारे में डॉक्टर से पूछें। खुद से डॉक्टर न बनें।

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    किन चीजों में मैग्नीशियम होता है?

    पालक, दालें, बादाम, सीताफल के बीज, सूरजमूखी के बीज, अलसी के बीज, हरी पत्तेदार सब्जियां, बीन्स,राजमा, काला चना, अंजीर, सोयाबीन और डार्क चॉकलेट ले रहे हैं क्योंकि उसमें 70 कोको होता है। ये सभी चीजें मैग्नीशियम का अच्छा सोर्स है।

    चाय-कॉफी का सेवन कम करें। इन दोनों की वजह से शरीर में मैगनीशियम कम एब्जॉर्ब होता है। इसके अलावा तली-भूनी चीजों का सेवन कम करना चाहिए। अगर शरीर में विटामिन डी की कमी है तो मैग्नीशियम अच्छे से एब्जॉर्ब नहीं होगा।