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बस्ती में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार दोपहर करीब 1 बजे गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने एक शोभायात्रा निकाली। यह यात्रा एपीएन डिग्री कॉलेज ग्राउंड से शुरू हुई, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। शोभायात्रा में पारंपरिक वेशभूषा पहने छोटे बच्चे हाथों में धनुष-बाण लिए हुए थे। डीजे की धुन पर लोग शामिल हुए। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रमोद कुमार गोंड ने यात्रा का नेतृत्व किया। एपीएन डिग्री कॉलेज ग्राउंड से शुरू होकर शोभायात्रा निर्धारित मार्ग से कंपनी बाग पहुंची। इसके बाद यात्रा शास्त्री चौक की ओर बढ़ी। शोभायात्रा का समापन शास्त्री चौक पर हुआ। इस दौरान दयाराम गोंड, गुड्डू कुमार गोंड, दीप चंद गोंड सहित समाज के कई सदस्य उपस्थित थे। आयोजकों ने बताया कि विश्व आदिवासी दिवस समाज की संस्कृति, परंपरा और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर है। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी विरासत और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ना है।
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विश्व आदिवासी दिवस पर शोभायात्रा:बस्ती में पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए लोग
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विश्व जूनियर एथलेटिक्स: मोहम्मद अशफाक ने तोड़ा राष्ट्रीय रिकॉर्ड
यूजीन (ओरेगन)। विश्व जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2026 के दूसरे दिन गुरुवार को भारत के मोहम्मद अशफाक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष 400 मीटर में नया अंडर-20 राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और फाइनल में जगह बना ली। वहीं, बसंत ने पुरुष हाई जंप के फाइनल के लिए क्वालीफाई कर भारत की उम्मीदें बरकरार रखीं।
19 वर्षीय अशफाक ने हीट-5 में 45.81 सेकंड का समय निकालकर दूसरा स्थान हासिल किया और सेमीफाइनल में प्रवेश किया। इस दौरान उन्होंने अप्रैल में बेंगलुरु में आयोजित अंडर-20 फेडरेशन कप में बनाए गए अपने ही 46.05 सेकंड के राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ दिया।
इसके बाद सेमीफाइनल की तीसरी हीट में अशफाक ने 46.00 सेकंड का समय लेकर तीसरा स्थान हासिल किया और फाइनल में जगह बनाई।
अमेरिका के क्विंसी विल्सन (45.02 सेकंड) और दक्षिण अफ्रीका के किर्न रोमिन (45.87 सेकंड) उनसे आगे रहे। वहीं, भारत के पियूष राज हीट-6 में 47.78 सेकंड के समय के साथ पांचवें स्थान पर रहे और फाइनल में जगह नहीं बना सके।
पुरुष हाई जंप में बसंत ने 2.14 मीटर की छलांग लगाकर ग्रुप-ए में पांचवां स्थान हासिल किया और फाइनल के लिए क्वालीफाई किया।
वहीं के. अंब्रीश ग्रुप-बी में 2.05 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ बाहर हो गए। दोनों ग्रुप में कोई भी खिलाड़ी 2.21 मीटर के स्वत: क्वालीफिकेशन मानक को पार नहीं कर सका।
महिला डिस्कस थ्रो फाइनल में अमनत कंबोज ने 53.24 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए छठा स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा का स्वर्ण पदक चीन की सू यिक्सिन ने 61.06 मीटर के अंडर-20 विश्व लीड थ्रो के साथ जीता।
महिला शॉट पुट में अंशु फाइनल में जगह बनाने से चूक गईं। उन्होंने क्वालीफिकेशन में 15.24 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया और ग्रुप-ए में नौवें तथा कुल 14वें स्थान पर रहीं। वह फाइनल के लिए निर्धारित कटऑफ से 21 सेंटीमीटर पीछे रह गईं।
महिला 400 मीटर बाधा दौड़ में तनु चौधरी ने 1:00.03 मिनट का समय निकालकर अपनी हीट में पांचवां स्थान हासिल किया और फाइनल में जगह नहीं बना सकीं।
वहीं, पुरुष 400 मीटर बाधा दौड़ में अमित कुमार 54.01 सेकंड के समय के साथ अपनी हीट में अंतिम स्थान पर रहे। पुरुष ट्रिपल जंप क्वालीफिकेशन में धनुष राज (14.71 मीटर) और पी. रॉयशन (15.20 मीटर) भी फाइनल के लिए क्वालीफाई नहीं कर सके।
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विश्व स्तनपान सप्ताह में नुक्कड़ नाटक से दिया जागरूकता संदेश:बाल रोग विभाग के कार्यक्रम में इंटर्न, नर्सिंग छात्रों की अहम भूमिका
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महर्षि वशिष्ठ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली के बाल रोग विभाग ने विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत गुरुवार को एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। पर्चा काउंटर के बगल आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एमबीबीएस इंटर्न और नर्सिंग छात्रों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक रहा। इस नाटक ने उपस्थित लोगों को स्तनपान के महत्व और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया। नुक्कड़ नाटक के जरिए यह संदेश दिया गया कि जन्म के पहले घंटे के भीतर शिशु को मां का दूध पिलाना उसके स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव रखता है। इसमें छह माह तक केवल स्तनपान कराने और उसके बाद पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने के लाभों को सरल और प्रभावी ढंग से समझाया गया। प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण और प्राकृतिक आहार है। यह बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, संक्रमण का खतरा कम करता है और उनके शारीरिक व मानसिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्तनपान माताओं के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इस कार्यक्रम में अस्पताल के विभिन्न विभागों के चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, नर्सिंग स्टाफ, एमबीबीएस इंटर्न, नर्सिंग छात्र-छात्राएं, मरीज और उनके परिजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे। उपस्थित लोगों ने नुक्कड़ नाटक की सराहना की और इसे जन जागरूकता का एक प्रभावी माध्यम बताया। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अलका शुक्ला ने सभी माताओं से अपील की कि वे भ्रांतियों से दूर रहकर नवजात शिशु को समय पर स्तनपान कराएं। उन्होंने समाज के प्रत्येक परिवार तक इस संदेश को पहुंचाने में सहयोग का आग्रह किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाना और स्तनपान के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना था। इस अवसर पर उप प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार यादव, डॉ. बी.एल. कनौजिया, डॉ. नंदिनी केसरवानी, डॉ. दिलीप वर्मा, डॉ. पंकज सिंह, डॉ. सोनल, डॉ. विवेक गौतम, डॉ. आफरीन और डॉ. आफताब आलम सहित बड़ी संख्या में मरीज भी उपस्थित थे।
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मां का पहला दूध नवजात के लिए अमृत:कैली अस्पताल में विश्व स्तनपान सप्ताह पर जागरूकता कार्यक्रम
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महर्षि वशिष्ठ स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक अस्पताल कैली के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। गायनी विभागाध्यक्ष डॉ. कल्पना मिश्रा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस दौरान गर्भवती एवं प्रसूता महिलाओं के साथ उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व और इसके स्वास्थ्य लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई। डॉ. कल्पना मिश्रा ने बताया कि जन्म के पहले एक घंटे के भीतर शिशु को स्तनपान कराना उसके स्वस्थ जीवन की सबसे अच्छी शुरुआत है। मां का पहला पीला गाढ़ा दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहते हैं, नवजात के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का कार्य करता है, जिससे उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कई गंभीर संक्रमणों से बचाव होता है। उन्होंने सभी माताओं से छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने की अपील की। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनल ने जानकारी दी कि केवल स्तनपान करने वाले बच्चों में दस्त, निमोनिया, कुपोषण और अन्य संक्रमणों का खतरा काफी कम रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छह माह तक बच्चे को पानी, शहद, घुट्टी या अन्य कोई आहार देने की आवश्यकता नहीं होती। इसके बाद पूरक आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखना चाहिए। डॉ. बंदना ने माताओं को स्तनपान कराने की सही तकनीक, स्वच्छता और संतुलित आहार के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सही तरीके से स्तनपान कराने से मां और शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है। गायनी में तैनात डॉ. जे.डी. यादव ने बताया कि स्तनपान से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है तथा माताओं में स्तन एवं अंडाशय के कैंसर का खतरा भी कम होता है। कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं की समस्याओं का समाधान किया गया तथा उन्हें नवजात की देखभाल, पोषण और स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों के बारे में भी जागरूक किया गया। इस अवसर पर डॉ. विवेक गौतम, डॉ. रूपाली नायक, डॉ. ऋचा सचान, डॉ. रुबी गुप्ता, डॉ. आफरीन, स्टाफ नर्स राजकुमारी, पुनीता, भावना, बिंदु सहित बड़ी संख्या में गर्भवती एवं प्रसूता महिलाएं और उनके परिवार के लोग मौजूद रहे।
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विश्व हिंदू परिषद ने बस्ती में बाल संस्कार कार्यक्रम किया:बच्चों में भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के विकास पर जोर
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बस्ती में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) मातृशक्ति एवं दुर्गा वाहिनी द्वारा बाल संस्कार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सेवा भावना और राष्ट्रभक्ति के संस्कारों का विकास करना था। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला अध्यक्ष गोपेश पाल ने किया। जिला अध्यक्ष गोपेश पाल ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में बच्चों को केवल आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ना भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि संस्कारवान बालक ही भविष्य में सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करते हैं। पाल ने कहा कि परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि बच्चों में सत्य, सेवा, अनुशासन, करुणा और राष्ट्रप्रेम जैसे गुणों का विकास किया जाए। विश्व हिंदू परिषद समाज में सांस्कृतिक जागरण एवं चरित्र निर्माण के उद्देश्य से ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर करती रहेगी। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को प्रेरक प्रसंगों, नैतिक शिक्षाओं, संस्कार गीतों और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति के आदर्शों से परिचित कराया गया। उपस्थित वक्ताओं ने बच्चों से अपने माता-पिता, गुरुजनों एवं समाज के प्रति सम्मान का भाव रखते हुए राष्ट्रहित में योगदान देने का आह्वान किया। इस अवसर पर बाल संस्कार प्रमुख अलका, प्रांत सह विशेष संपर्क प्रमुख धर्मेंद्र चौरसिया, सह जिला मंत्री विनय सिंह रावत, दुर्गा वाहिनी संयोजिका रजनी और नगर मंत्री अभिनव दुबे सहित विश्व हिंदू परिषद एवं दुर्गा वाहिनी के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता, बच्चे और अभिभावक उपस्थित रहे।
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ठाणे को वाघबिल में 26 करोड़ रुपये की लागत से विश्व स्तरीय शूटिंग कॉम्प्लेक्स मिलेगा
महाराष्ट्र सरकार ने ठाणे के वाघबिल में 26 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली अत्याधुनिक शूटिंग रेंज और मल्टी-पर्पस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट का मकसद स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और भविष्य के शूटिंग चैंपियन तैयार करना है।(Thane To Get INR 26 Crore World Class Shooting Complex in Waghbil)
ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर प्रताप सरनाइक ने घोषणा की कि यह फैसिलिटी हीरानंदानी एस्टेट के पास 2,020 स्क्वायर मीटर के एमेनिटी प्लॉट पर बनाई जाएगी, जिसके लिए डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे की लीडरशिप वाले अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट से फंडिंग मिलेगी। इस मल्टी-स्टोरी कॉम्प्लेक्स का बिल्ट-अप एरिया करीब 4,522 स्क्वायर मीटर होगा।
स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की 10-मीटर, 25-मीटर और 50-मीटर की शूटिंग रेंज के साथ-साथ ट्रेनिंग हॉल, दर्शक गैलरी, प्लेयर लाउंज, एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिस, इक्विपमेंट स्टोरेज, एक कैफेटेरिया और बेसमेंट पार्किंग की सुविधा होगी। इस फैसिलिटी से ठाणे, मुंबई और नवी मुंबई के एथलीटों को सर्विस मिलने की उम्मीद है। सरनाइक ने कहा कि इस प्रोजेक्ट का मकसद उभरते हुए शूटर्स को वर्ल्ड-क्लास ट्रेनिंग की सुविधाएं देना और नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर मुकाबला करने लायक एथलीट तैयार करने में मदद करना है। इस पहल का मकसद ठाणे को शूटिंग स्पोर्ट्स का एक बड़ा हब बनाना भी है।
यह भी पढ़ें- महाराष्ट्र लोकल बॉडी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए AI, जियो-टैगिंग शुरू करेगा
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सिसवा में गुरु पूर्णिमा पर पांच कुंडीय यज्ञ:गायत्री शक्तिपीठ में सामूहिक हवन, श्रद्धालुओं ने की विश्व कल्याण की कामना
सिसवा नगरपालिका के मीराबाई नगर वार्ड स्थित श्रीराम-जानकी मंदिर परिसर के गायत्री शक्तिपीठ में बुधवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पांच कुंडीय महायज्ञ और सामूहिक हवन का आयोजन किया गया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और विश्व शांति तथा मानव कल्याण की कामना की। कार्यक्रम का आरंभ मंगलवार को संपन्न हुए 12 घंटे के अखंड जप के बाद हुआ। श्रद्धालुओं ने माता गायत्री, युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा का पूजन किया। इसके बाद वैदिक रीति-रिवाज से पांच कुंडीय यज्ञ में आहुतियां समर्पित की गईं, जिससे वातावरण वैदिक मंत्रों की गूंज से भक्तिमय हो गया। प्रवचन सत्र के दौरान वक्ताओं ने गुरु की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गुरु अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। शर्मा विश्वकर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु का स्थान सर्वोच्च है, क्योंकि वे शिष्य को सही मार्ग दिखाकर उसके जीवन को सार्थक बनाते हैं और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। कार्यक्रम का समापन सामूहिक आरती और महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ। इस अवसर पर अनिल जायसवाल, कृष्णमुरारी सिंह, इंजीनियर सुरेश खरवार, शकुंतला जायसवाल, निर्मला खरवार, कविता विश्वकर्मा, सोनी विश्वकर्मा सहित सैकड़ों महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित थे।
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बस्ती में कब्जा हटाने पहुंचे विश्व हिंदू महासभा पदाधिकारी:कार्यकर्ता के उत्पीड़न का आरोप, आंदोलन की चेतावनी दी
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बस्ती जिले के दुबौलिया थाना क्षेत्र स्थित ग्राम बैरागल में बंजर भूमि से कब्जा हटाने को लेकर विवाद सामने आया है। विश्व हिंदू महासभा के जिलाध्यक्ष अखिलेश सिंह, जिला उपाध्यक्ष सौरभ चतुर्वेदी और ब्लॉक अध्यक्ष सतीश पांडेय अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि विश्व हिंदू महासभा के कार्यकर्ता अरुण गुप्ता को संगठन से जुड़े होने के कारण जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने ग्राम प्रधान, हल्का सिपाही और हल्का लेखपाल सहित अन्य संबंधित लोगों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि गांव की बंजर भूमि पर मौजूद अन्य अवैध कब्जों को जल्द मुक्त नहीं कराया गया, तो संगठन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। इस संबंध में लेखपाल इशांत शुक्ला से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन बार-बार फोन करने के बावजूद उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। वहीं, इस पूरे प्रकरण पर कानूनगो किरपत राम ने बताया कि जो कब्जा हटाया गया है, वह उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में किया गया है। प्रभावित कार्यकर्ता अरुण गुप्ता ने कहा कि उन्होंने धारा 24 के तहत एक मामला दायर किया है, जो न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने उनके खेत में लगी धान की फसल को नष्ट कर दिया। इस मामले में दोनों पक्षों के बयान सामने आने के बाद अब प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार है।
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दुबौलिया में विश्व हिंदू महासंघ महामंत्री की माता का निधन:पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने शोक संवेदना व्यक्त की
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विश्व हिंदू महासंघ के दुबौलिया ब्लॉक महामंत्री राजकुमार विश्वकर्मा की माता का निधन हो गया है। उनके निधन की सूचना मिलते ही विश्व हिंदू महासंघ परिवार के पदाधिकारी और कार्यकर्ता बस्ती जिले के सिरसिया (चिलम बाजार) स्थित उनके निवास स्थान पर पहुंचे। पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने दुख की इस घड़ी में परिवार को सांत्वना दी। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष अखिलेश सिंह, जिला उपाध्यक्ष नितिन चौबे, ब्लॉक अध्यक्ष सतीश पांडेय, ब्लॉक अध्यक्ष बहादुरपुर अभय चौधरी, ब्लॉक अध्यक्ष कुदरहा रूपनरायन गौड़, और ब्लॉक उपाध्यक्ष बहादुरपुर दीपू सिंह सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी उपस्थित लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति मिलने की कामना की।
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सारनाथ को मिली वैश्विक पहचान, यूनेस्को ने विश्व धरोहर सूची में किया शामिल
- यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा
- बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शामिल सारनाथ
वाराणसी। लगभग 28 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद भगवान बुद्ध की प्रथम धर्मदेशना स्थली सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है। दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में शनिवार शाम इस ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा की गई। इसके साथ ही सारनाथ भारत का 45वां तथा उत्तर प्रदेश का चौथा यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बन गया है।
इस उपलब्धि से बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शामिल सारनाथ को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है। साथ ही, उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के मानचित्र पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सारनाथ को 3 जुलाई 1998 को यूनेस्को की टेंटेटिव (संभावित) सूची में शामिल किया गया था। लगभग 28 वर्षों बाद मिली यह मान्यता उत्तर प्रदेश के लिए विशेष महत्व रखती है। अब तक राज्य के तीन विश्व धरोहर स्थल—ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी-आगरा मंडल तक सीमित थे। सारनाथ के शामिल होने से प्रदेश की विश्व धरोहर पहचान पूर्वांचल तक विस्तृत हो गई है और राज्य की समृद्ध बौद्ध विरासत को वैश्विक मान्यता मिली है।
चौखंडी स्तूप और पुरातात्विक अवशेषों को मिली मान्यता
यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त इस विश्व धरोहर संपत्ति में चौखंडी स्तूप तथा सारनाथ का पुरातात्विक परिसर शामिल है। दोनों स्थल एक-दूसरे से लगभग 626 मीटर की दूरी पर स्थित हैं। चौखंडी स्तूप भगवान बुद्ध और उनके पांच प्रथम शिष्यों के मिलन का प्रतीक माना जाता है, जबकि पुरातात्विक परिसर में धामेक स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, प्राचीन विहारों के अवशेष और अशोक स्तंभ जैसे महत्वपूर्ण स्मारक शामिल हैं। ये स्मारक सारनाथ के विश्व के प्रमुख बौद्ध आस्था एवं ज्ञान केंद्र के रूप में हुए ऐतिहासिक विकास की गवाही देते हैं।बौद्ध धर्म में सारनाथ का विशेष महत्व
सारनाथ वही पावन स्थल है जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश देकर ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ की शुरुआत की थी। प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में इसका उल्लेख ‘ऋषिपत्तन’ के नाम से मिलता है। यहीं भगवान बुद्ध ने अपने प्रथम पांच शिष्यों को धर्म का उपदेश देकर करुणा, शांति और मध्यम मार्ग का संदेश मानवता को दिया था।करीब 2600 वर्षों से सारनाथ बौद्ध आस्था, तीर्थ परंपरा, मठ जीवन, प्राचीन स्थापत्य और समृद्ध कला विरासत का प्रमुख केंद्र रहा है। यूनेस्को की यह मान्यता इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिष्ठा प्रदान करेगी।
’28 वर्षों की प्रतीक्षा का ऐतिहासिक परिणाम’
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान प्रदेश की बहुआयामी सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के सतत प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने सभी आस्था एवं विरासत स्थलों के संरक्षण और विकास को समान प्राथमिकता दी है।उन्होंने कहा कि 28 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद सारनाथ को मिला यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिससे उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट को नई वैश्विक पहचान मिलेगी और प्रदेश का शांति, आध्यात्मिकता एवं सांस्कृतिक समावेश का संदेश दुनिया तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।
‘सारनाथ की पहचान केवल स्मारकों तक सीमित नहीं’
सारनाथ के यूनेस्को नामांकन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली संरक्षण वास्तु विशेषज्ञ आभा नारायण लांबा ने कहा कि सारनाथ की पहचान केवल इसके स्मारकों तक सीमित नहीं है। यह वह पवित्र स्थल है जहां भगवान बुद्ध ने प्रथम धर्मदेशना दी, बौद्ध संघ की स्थापना हुई और बौद्ध स्थापत्य की प्रारंभिक परंपराओं का विकास हुआ। उन्होंने कहा कि लगभग ढाई हजार वर्षों से यहां जीवित बौद्ध तीर्थ परंपरा इस स्थल को विशिष्ट सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का दर्जा प्रदान करती है।‘पर्यटन को मिलेगा नया आयाम’
पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने इसे उत्तर प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह प्रदेश के पर्यटन स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम है।उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2025 में लखनऊ को यूनेस्को की ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ की मान्यता मिलने के बाद अब सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त करेगा। इससे विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने, उनके प्रवास की अवधि में वृद्धि होने तथा उत्तर प्रदेश के व्यापक बौद्ध सर्किट को वैश्विक स्तर पर नई गति मिलने की संभावना है।
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विश्व कप फाइनल के बाद स्पेन-अर्जेंटीना खिलाड़ियों की झड़प पर फीफा सख्त, जांच शुरू
नई दिल्ली। फेडरेशन इंटरनेशनेल डी फुटबॉल एसोसिएशन (फीफा) ने रविवार को खेले गए फीफा विश्व कप 2026 के फाइनल के बाद मैदान पर स्पेन और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों व कोचिंग स्टाफ के बीच हुई हिंसक झड़प की अनुशासनात्मक जांच शुरू कर दी है।
न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए फाइनल में फेरान टोरेस ने अतिरिक्त समय (106वें मिनट) में गोल कर स्पेन को अर्जेंटीना पर 1-0 से जीत दिलाई और स्पेन ने अपना दूसरा पुरुष फीफा विश्व कप खिताब जीता। हालांकि मुकाबले के अंत में अर्जेंटीना खिलाड़ियों के अनुशासनहीन व्यवहार ने मैच की चमक फीकी कर दी।
इससे पहले अतिरिक्त समय के अंतिम क्षणों में अर्जेंटीना के मिडफील्डर एंजो फर्नांडीज को स्पेन के पाउ कुबार्सी पर खतरनाक फाउल करने के कारण रेफरी स्लावको विनचिच ने दूसरा पीला कार्ड दिखाकर लाल कार्ड दे दिया था।
मैच समाप्त होने के बाद सामने आए वीडियो में अर्जेंटीना के लिएंड्रो परेडेस और नाहुएल मोलिना को स्पेन के एरिक गार्सिया और रोद्री के साथ हाथापाई करते देखा गया। वहीं अर्जेंटीना के सहायक कोच रोबर्टो आयाला भी कथित तौर पर स्पेन के दानी ओल्मो पर हाथ उठाते नजर आए।
इसके बाद मोलिना ने रोद्री को घेर लिया, जबकि अर्जेंटीना के डिफेंडर निकोलस ओटामेंडी ने अपने पूर्व मैनचेस्टर सिटी साथी रोद्री के साथ तीखी बहस की।
स्थिति को शांत कराने के लिए अर्जेंटीना के मुख्य कोच लियोनेल स्कालोनी और दोनों टीमों के अन्य खिलाड़ी बीच-बचाव के लिए मैदान में पहुंचे।
फीफा ने अब पुष्टि की है कि पूरे मामले की अनुशासनात्मक जांच शुरू कर दी गई है और यह देखा जाएगा कि फीफा अनुशासन संहिता के उल्लंघन के मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाए।
फीफा के आधिकारिक बयान में कहा गया, “स्पेन और अर्जेंटीना के बीच खेले गए फीफा विश्व कप फाइनल की मैच रिपोर्ट का आकलन करने और फीफा अनुशासन संहिता (एफडीसी) के अनुच्छेद 36 के तहत फीफा अनुशासन समिति ने मैच के बाद हुई घटनाओं की जांच के लिए एक अनुशासन एवं नैतिकता अभियोजक नियुक्त किया है, जो संभावित उल्लंघनों की जांच करेगा।”
बयान में आगे कहा गया, “अभियोजक की रिपोर्ट पूरी होने के बाद फीफा अनुशासन समिति आगे की जानकारी सार्वजनिक करेगी।”
गौरतलब है कि अर्जेंटीना के एंजो फर्नांडीज विश्व कप फाइनल में लाल कार्ड पाने वाले 2010 के बाद पहले खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले 2010 विश्व कप फाइनल में नीदरलैंड्स के जॉन हाइटिंगा को दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में स्पेन के खिलाफ खेले गए फाइनल में लाल कार्ड दिखाया गया था।
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विश्व हिंदू रक्षा परिषद के युवा वैज्ञानिक परिजनों से मिला:सिसवा में सीबीआई जांच, सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता की मांग
विश्व हिंदू रक्षा परिषद की टीम सोमवार को युवा वैज्ञानिक राहुल सिंह के सिसवा स्थित आवास पर पहुंची। टीम ने राहुल सिंह के परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान परिषद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से राहुल सिंह की संदिग्ध मृत्यु की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने परिवार के एक सदस्य (भाई) को सरकारी नौकरी और उचित आर्थिक सहायता प्रदान करने की भी अपील की। परिषद के पदाधिकारियों ने बताया कि राहुल सिंह बचपन से ही प्रतिभाशाली थे। वह परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और कम उम्र में ही उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां संभाल ली थीं। उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मृत्यु से परिवार और समाज स्तब्ध है। विश्व हिंदू रक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय ने कहा कि राहुल सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मिलेगी, जब उनकी संदिग्ध मृत्यु की निष्पक्ष जांच होगी। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इस अवसर पर विश्व हिंदू रक्षा परिषद के पदाधिकारी मनीष राय, हिमांशु धवल, दीपक राय, पंडित सुभाष शर्मा, आलोक कुमार त्रिपाठी, प्रकाश आर्य, ओम शंकर गुप्ता, पंकज अग्रवाल, दीपक यादव, देव महाराज और सुंदरम राय सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित थे।
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