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कतर से ईरान तक बात, शहबाज शरीफ शांति के लिए डोनाल्ड ट्रंप को मना पाएंगे?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक बार फिर ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता की पहल को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत दोबारा शुरू हो, इसके लिए वह ईरान और कतर के नेताओं से अलग-अलग फोन पर बात कर रहे हैं। पाकिस्तान, दोनों की शांति वार्ता का मध्यस्थ रहा है लेकिन यह शांति वार्ता रद्द हो चुकी है।

एक बार फिर पाकिस्तान की पहल पर शांति बहाल करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान शांति वार्ता के लिए बेचैन है, वहीं ईरान ने उनके इस दावे को एक सिरे से खारिज किया था। ईरान पहले ही कह चुका है कि हर हमले का जवाब दिया जाएगा।

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ईरान से पाकिस्तान क्या बात की?

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बात की। उन्होंने क्षेत्र में हाल में बढ़े तनाव पर गहरी चिंता जताई और कहा कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को तुरंत बहाल करना बहुत जरूरी है।

क्या चाहते हैं शहजाब शरीफ?

शहबाज शरीफ ने सभी पक्षों से अपील की कि वे संयम बरतें और ऐसी कोई कार्रवाई न करें जिससे पिछले कुछ महीनों में शांति के लिए जो प्रगति हुई है, वह खतरे में पड़ जाए।

शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत की गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने पर जोर दिया।

उन्होंने इसे क्षेत्र और उसके बाहर आपसी समझ, सम्मान और साझा समृद्धि का स्थायी ढांचा बताया। शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान शांति के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और संवाद शुरू करने तथा शांति बनाए रखने के हर प्रयास में इस्लामाबाद ईमानदारी और गंभीरता से भूमिका निभाने को तैयार है।

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ईरान का रुख क्या है?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शांति के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए पाकिस्तान के रचनात्मक सहयोग की सराहना की। दोनों नेताओं ने पिछले महीने पेजेश्कियन की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान लिए गए फैसलों की समीक्षा की।

कतर के अमीर से पाकिस्तान ने क्या बात की?

प्रधानमंत्री शरीफ ने कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से भी फोन पर बात की। उन्होंने क्षेत्र में बढ़े तनाव पर चिंता जताई। शहबाज शरीफ ने सभी पक्षों से संयम बरतने युद्ध टालने की अपील की।

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समझौते पर संकट क्यों आया?

इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन अब अधर में है। अमेरिका और ईरान ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए 18 जून को समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद 21 जून को स्विट्जरलैंड में तकनीकी स्तर की वार्ता हुई थी, जिसमें पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे थे। दोनों देश एक बार फिर टकरा गए हैं।

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई को मार डाला। उनकी लाश, 4 महीने बाद 9 जुलाई को दफनाई गई। दोनों देशों के बीच तनाव चम पर रहा। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने का एक शुरुआती समझौता हुआ लेकिन जुलाई 2026 में यह फिर टूट गया।

ईरान ने जुलाई में ही एक व्यापारिक विमान पर हमला बोला, जिसके जबाव में अमेरिका ने भी हमले किए। डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में कहा है कि यह समझौता अब खत्म है। अब एक बार फिर पाकिस्तान शांति वार्ता कराने की कोशिश कर रहा है।

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