रामजानकी मार्ग के पाऊं गांव स्थित सोमेश्वरनाथ धाम शिव मंदिर परिसर में नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के छठवें दिन अवधधाम से पधारे सुप्रसिद्ध कथावाचक पं. प्रदीप शास्त्री ने श्रीकृष्ण विवाह के उपरांत की दिव्य लीलाओं का वर्णन किया। पं. प्रदीप शास्त्री ने बताया कि रुक्मिणी जी से विवाह के बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारिका नगरी में विराजे। यहां उन्होंने आदर्श गृहस्थ जीवन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हुए धर्म, नीति और मर्यादा स्थापित की। उन्होंने जोर दिया कि श्रीकृष्ण का जीवन केवल लीलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को दिशा देने वाला एक आदर्श भी है। कथा के दौरान नरकासुर वध के बाद 16,100 बंदी स्त्रियों के उद्धार का प्रसंग सुनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण ने इन स्त्रियों को सामाजिक सम्मान प्रदान करते हुए अपने जीवन में स्थान दिया। शास्त्री जी ने इस प्रसंग को भगवान की करुणा, संवेदनशीलता और समाज के प्रति उनके उत्तरदायित्व का उदाहरण बताया। इसके अतिरिक्त, सत्यभामा और जाम्बवती सहित अन्य रानियों के साथ श्रीकृष्ण के विवाह और उनसे जुड़ी लीलाओं का भी विस्तृत वर्णन किया गया। कथावाचक ने सुदामा चरित्र के माध्यम से सच्ची मित्रता, समर्पण और निष्काम भक्ति का संदेश दिया, जिससे श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गए। शास्त्री जी ने अपने प्रवचन में कहा कि श्रीकृष्ण का गृहस्थ जीवन धर्म, न्याय और प्रेम का अद्वितीय समन्वय है। यह प्रत्येक व्यक्ति को कर्तव्यपरायणता, विनम्रता और परोपकार की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और उन्होंने भक्तिभाव से कथा का श्रवण किया। इस अवसर पर मुख्य यजमान शिव शंकर शुक्ल, कुलभूषण दूबे, गंगा प्रसाद दूबे, दुर्गा प्रसाद शुक्ला, काशी नाथ दूबे, भगवानदेव तिवारी, भगवती शुक्ल, राजेन्द्र दूबे, श्याम सुन्दर दूबे, घनश्याम दूबे, अजय दूबे, दिलीप मोदनवाल, पुनीत शुक्ला, सुनील शुक्ला और विपिन सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद थे।
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