ईरान युद्ध का हल निकालने में पाकिस्तान सक्रिय भूमिका निभा रहा है। पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है। मगर अभी तक तीनों पक्षों ने एक दूसरे पर हमलों को रोका नहीं है। इस बीच रविवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में तुर्की, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों की दो दिवसीय अहम बैठक चल रही है, ताकि मध्य पूर्व में फैले संघर्ष को रोका जा सके।
अमेरिका के संदेशों को पाकिस्तान तेहरान तक पहुंचा रहा है। तेहरान की हर बात अमेरिका तक पहुंचाया जा रहा है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पाकिस्तान और इजरायल के बीच सीधे बातचीत नहीं हो रही है। अगर पाकिस्तान को कोई संदेश पहुंचाना होता है तो उसे अमेरिका के माध्यम से भेजना पड़ता है। पाकिस्तान के सक्रिय होने के बाद से इजरायल ने तेहरान पर अपनी बमबारी तेज कर दी है।
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पाकिस्तान के ख्वाब में कैसे खटाई में डाल सकता है इजरायल?
पाकिस्तान के अनुरोध पर ही इजरायल ने ईरान के विदेश मंत्री और संसद के अध्यक्ष का नाम हिट लिस्ट से सिर्फ पांच दिनों की खातिर बाहर किया है। अगर वार्ता में प्रगति नहीं होती है तो इजरायल शीर्ष नेताओं को निशाना बना सकता है। अहम ठिकानों को तबाह कर सकता है। उधर, अमेरिका जमीनी हमले की तैयारी में है। बातचीत के पटरी से उतरने की स्थिति में अमेरिका भी हमले तेज कर सकता है।
पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती इजरायल को मनाने की है। वह भी तब, जब उसके सीधे संबंध नहीं है। समन्वय की कमी से अगर इजरायल कोई बड़ा हमला करता है तो पाकिस्तान की सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। इसी बात की आशंका ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जताई है। उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से बात की और इजरायल व अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून को कमजोर करने का आरोप लगाया।
अमेरिका का दोहरा गेम
डोनाल्ड ट्रंप ने पहले पांच दिन की मोहलत दी। बाद में इसे बढ़ाकर 10 दिन कर दिया। मतलब यह है कि ईरान पर अमेरिका सेना 6 अप्रैल तक कोई हमला नहीं करेगी। मगर दूसरी तरफ इजरायल बेधड़क हमलों को अंजाम दे रहा है। पाकिस्तान के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती है। हाल ही में तेहरान स्थित पाकिस्तान दूतावास के करीब ही इजरायल ने बड़ा हमला किया। इसके बाद पाकिस्तान के सरकारी थिंक टैंक ने इजरायल को खुले तौर पर तबाह करने की धमकी दे डाली।
पाकिस्तान की बात मानेगा इजरायल?
पाकिस्तान की सरकार ईरान पर इजरायली हमले की खुलकर निंदा करती है। मगर अमेरिका हमलों पर चुप्पी साधती है। बयानबाजी का नतीजा है कि इजरायल और पाकिस्तान के बीच कटुता बढ़ती जा रही है। ऐसे में देखना यह होगा कि पाकिस्तान के किसी प्रस्ताव को इजरायल मानता है या नहीं।
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विश्वास बहाली सबसे बड़ी चुनौती
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पांच दिन में दूसरी बार ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर करीब 90 मिनट बातचीत की। वार्ता में सबसे बड़ा मुद्दा विश्वास रहा है। ईरानी राष्ट्रपति ने बताया कि पिछली दो वार्ताओं के दौरान अमेरिका और इजरायल दो बार हमला कर चुके हैं। एक तरफ बातचीत की जाती है और दूसरी तरफ हमलों को अंजाम दिया जाता है। बता दें कि इजरायल और अमेरिका के पिछले ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए ईरान का संदेह गहराने लगा है।










