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‘दुनिया एक्शन ले, चुप्पी से शांति नहीं आएगी’, UN में अमेरिका पर भड़का ईरान

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वर्चुअल तौर पर संयुक्त राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने मिनाब में लड़कियों के प्राथमिक स्कूल को निशाना बनाने पर अमेरिका और इजरायल की जमकर आलोचना की और इसे युद्ध अपराध बताया। अराघची ने कहा कि इस घटना की सभी को निंदा करना चाहिए। यह कोई भूल या महज कोई घटना नहीं थी। यह आक्रामक युद्ध बिल्कुल अनुचित है। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को यह आक्रामकता शुरू की।

बता दें कि ईरान ने मीनाब स्थित प्राथमिक स्कूल में हुए हमले में 160 से अधिक लड़कियों की मौत का दावा किया था। अपने संबोधन में अब्बास अराघची ने कहा कि जब तक जरूरत पड़ेगी तब तक ईरान अपनी आत्मरक्षा करता रहेगा। उन्होंने दुनिया से अन्याय के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया है।

‘सोची समझी रणनीति के तहत स्कूल पर हमला’

अराघची ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के पास अल्ट्रामॉर्डन तकनीक और सैन्य डेटा सिस्टम हैं। बावजूद इसके स्कूल पर हमला किया गया। यह जानबूझकर और सोझी समझी साजिश का हिस्सा है। यह ऐसा अत्याचार है, जिस पर न तो पर्दा डाला जा सकता है और न ही उचित ठहराया जा सकता है। इस पर चुप्पी भी नहीं साधी जा सकती है।

ईरान धरती पर सबसे समृद्ध सभ्यताओं का उत्तराधिकारी है। शांतिप्रिय और महान राष्ट्र ईरान ने कभी युद्ध नहीं चाहा। बावजूद इसके क्रूर अपराधियों के खिलाफ खुद की रक्षा करने में अटूट दृढ़ता दिखाई। यह आत्मरक्षा तब तक जारी रहेगी जब तक इसकी जरूरत होगी।

चुप्पी से शांति नहीं आएगी: अराघची

अराघची ने आगे कहा कि अन्याय के विरुद्ध चुप्पी और उदासीनता से शांति और सुरक्षा नहीं गाएगी, बल्कि और असुरक्षा व मानवाधिकार का उल्लंघन होगा। संयुक्त राष्ट्र और इसके मूल मूल्य समेत पूरा मानवाधिकार ढांचा खतरे में है। हमलावरों की निंदा सभी को करना चाहिए।

‘युद्ध अपराध शब्द पर्याप्त नहीं’

अराघची ने यह भी कहा कि ईरान के लोगों के खिलाफ हो रहे अत्याचार को बताने की खातिर युद्ध अपराध शब्द पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान पर मनमानी और अन्यायपूर्ण तरीके से युद्ध थोपा गया है। संयुक्त राष्ट्र के मूल्य दांव पर लगे हैं। दुनिया को कार्रवाई करनी चाहिए।

ईरानी विदेश मंत्रालय ने यह भी बताया कि पिछले 27 दिन में अमेरिका और इजरायल ने रेड क्रिसेंट के बचावकर्मी, रिफाइनरी, एम्बुलेंस, अस्पताल, स्वास्थ्यकर्मी, जल स्रोत और आवासीय इलाकों को निशाना बनाया। पूरे ईरान में 600 से अधिक स्कूल नष्ट या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नतीजा यह है कि 1000 से अधिक छात्र और शिक्षक मारे जा चुके हैं या घायल हैं।

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