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सिद्धार्थनगर में पत्नी की जेवर बेचकर किसान ने दी रिश्वत:नायब तहसीलदार पर कार्रवाई की संस्तुति, 30 हजार वसूली


सिद्धार्थनगर में रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। वरासत प्रकरण के निस्तारण के लिए एक किसान को अपनी पत्नी के जेवर बेचकर घूस देने की मजबूरी झेलनी पड़ी। मामले के खुलासे के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए नायब तहसीलदार के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर दी है। इस कार्रवाई से राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है। मामला बांसी तहसील के खेसरहा क्षेत्र का है। ग्राम टीकुर निवासी किसान का आरोप है कि उसके वरासत प्रकरण के निस्तारण के लिए उससे कुल 30 हजार रुपए की वसूली की गई। यह रकम एक कथित निजी मुंशी के माध्यम से तीन किश्तों में ली गई। 15 हजार रुपए की अतिरिक्त मांग पीड़ित के मुताबिक, पैसे देने के बावजूद उसका मामला लंबित रखा गया और बाद में उससे 15 हजार रुपए की अतिरिक्त मांग की गई। मजबूरी में किसान को अपनी पत्नी के कान की बाली और घर का गेहूं बेचकर पैसे जुटाने पड़े। उसने इस पूरे लेन-देन से जुड़े साक्ष्य प्रशासन को सौंप दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच उपजिलाधिकारी इटवा को सौंपी गई। जांच के दौरान दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर बयान दर्ज किए गए और कॉल लॉग समेत अन्य साक्ष्यों की जांच की गई। इसमें शिकायतकर्ता और कथित मुंशी के बीच लगातार संपर्क की पुष्टि हुई, जिससे लेन-देन के आरोपों को बल मिला। मुंशी की भूमिका संदिग्ध पाई गई जांच में यह भी सामने आया कि जिस अधिवक्ता से मुंशी के जुड़े होने की बात कही जा रही थी, उनका इस प्रकरण से कोई औपचारिक संबंध नहीं था। इससे मुंशी की भूमिका संदिग्ध और अनधिकृत पाई गई। जांच रिपोर्ट में यह भी उजागर हुआ कि लंबे समय से लंबित प्रकरण के निस्तारण में अनावश्यक देरी की गई और इसके पीछे कोई ठोस कारण सामने नहीं आया। इससे संबंधित अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। साक्ष्यों और बयानों के आधार विभागीय कार्रवाई हालांकि नायब तहसीलदार ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने शिकायतकर्ता से कोई धनराशि नहीं ली। उन्होंने देरी का कारण पक्षकार की अनुपस्थिति और अन्य प्रशासनिक परिस्थितियों को बताया, लेकिन जांच में उनके तर्क संतोषजनक नहीं पाए गए। उपलब्ध साक्ष्यों और बयानों के आधार पर जांच अधिकारी ने नायब तहसीलदार की कार्यशैली को संदिग्ध मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति कर दी है। डीएम शिवशरणप्पा जीएन ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि जांच आख्या प्राप्त हो चुकी है और संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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