कौशाम्बी। जिले के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, कौशाम्बी के बाल रोग विभाग की एसएनसीयू टीम ने अत्यंत कम जन्म वजन वाले समयपूर्व नवजात का सफल उपचार कर चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। महज 900 ग्राम वजन के इस नवजात को गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की लगातार निगरानी, श्वसन सहायता, संक्रमण से बचाव और बेहतर पोषण के चलते नवजात ने जिंदगी की जंग जीत ली। स्वस्थ होने के बाद उसे एसएनसीयू से छुट्टी दे दी गई।
मंझनपुर विकासखंड के करारी गांव निवासी महिला ने 21 जुलाई 2026 को समयपूर्व एक नवजात को जन्म दिया। जन्म के समय शिशु का वजन महज 900 ग्राम था। समयपूर्व जन्म के साथ ही उसे सांस लेने में परेशानी (रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस) होने लगी। स्थिति गंभीर देखते हुए नवजात को तत्काल स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के बाल रोग विभाग स्थित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया।
एसएनसीयू में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेश कुमार रस्तोगी, जूनियर रेजीडेंट डॉ. बाहिद अख्तर तथा प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ भूपेन्द्र कुमार सिंह, बीना भारती और बीनू यादव ने नवजात की विशेष देखभाल शुरू की। टीम ने लगातार स्वास्थ्य की निगरानी करते हुए जरूरत के अनुसार श्वसन सहायता उपलब्ध कराई। साथ ही संक्रमण से बचाव और आवश्यक पोषण की व्यवस्था की गई।
नवजात की बेहद कम वजन और समयपूर्व जन्म की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकीय टीम ने पूरी सावधानी के साथ उपचार जारी रखा। लगातार निगरानी और बेहतर देखभाल के परिणामस्वरूप शिशु के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होने लगा।
स्वास्थ्य में सुधार के बाद नवजात को कुछ दिनों तक कंगारू मदर केयर (केएमसी) वार्ड में रखा गया। यहां शिशु को आवश्यक देखभाल और उपचार दिया गया। चिकित्सकों की सलाह और अभिभावकों के सहयोग से नवजात की स्थिति में लगातार सुधार होता गया। इसके बाद वह पूरी तरह स्वस्थ और स्थिर अवस्था में पहुंच गया।
महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. हरिओम कुमार सिंह ने इस सफलता पर बाल रोग विभाग, एसएनसीयू की पूरी टीम और स्वास्थ्यकर्मियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अत्यंत कम जन्म वजन वाले समयपूर्व नवजात का सफल उपचार टीमवर्क, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और स्वास्थ्यकर्मियों की समर्पित सेवाओं का परिणाम है। उन्होंने कहा कि संस्थान में नवजातों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सकीय टीम लगातार प्रयासरत है।












