नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान इसे महिलाओं का अधिकार बताते हुए सभी दलों से इन्हें सर्वसम्मति से पारित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दशकों से महिला आरक्षण को लटकाए रखा गया और अब देश के पास इस ह्लपाप से मुक्तिह्व पाने का अवसर है।
लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े तीन विधेयकों पर चल रही चर्चा में भाग लेते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से लोकतंत्र और विधायिका दोनों मजबूत होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि राष्ट्रहित के निर्णय के रूप में देखा जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इन विधेयकों के पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को उनका हक देने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित किया था और अब इसे आगे बढ़ाने का समय है।
मोदी ने परिसीमन को लेकर भी आशंकाओं को दूर करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि उत्तर, दक्षिण, पूर्व या पश्चिम-किसी भी क्षेत्र के साथ अन्याय नहीं होगा और सीटों में वृद्धि भी समान अनुपात में की जाएगी।
उन्होंने कहा कि देश के संसदीय इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण क्षण है, जिसे सही दिशा देकर एक मजबूत लोकतांत्रिक धरोहर बनाया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यदि सभी दल मिलकर निर्णय लेते हैं, तो इसका श्रेय किसी एक पार्टी या व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र को मिलेगा।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में सैकड़ों जिला पंचायतों, हजारों ब्लॉक पंचायतों और शहरी निकायों में महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं, जो उनकी क्षमता और योगदान को दशार्ता है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि संसद और विधानसभाओं में भी महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।












