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वैश्विक चुनौतियों से दबाव में भारत का मैन्युफैक्चरिंग निर्यात क्षेत्र,सप्लाई चेन हुई बाधित

  • इनपुट लागत 10-15% बढ़ी, कंपनियों की प्रतिस्पर्धा पर असर
  • शिपिंग महंगी और निर्यात में गिरावट आशंका

नई दिल्ली। वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के बीच भारत का मैन्युफैक्चरिंग निर्यात क्षेत्र इन दिनों दबाव में है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, बढ़ती इनपुट लागत और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याओं ने उद्योग की लागत संरचना को प्रभावित किया है, जिसका असर निर्यात पर पड़ता दिखाई दे रहा है।

उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, कच्चे माल और ईंधन की कीमतों में हाल के हफ्तों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुछ कंपनियों का कहना है कि मार्च में उनकी इनपुट लागत में 10 से 15 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। इससे उत्पादन महंगा हुआ है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई है। खासतौर पर उन कंपनियों पर दबाव ज्यादा है, जिनका निर्यात अमेरिका और यूरोप जैसे बाजारों में होता है, जहां पहले से ही टैरिफ और मांग की अनिश्चितता बनी हुई है।

पश्चिम एशिया में तनाव का असर सिर्फ कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि सप्लाई चेन पर भी पड़ा है। इस क्षेत्र के कई देशों के साथ भारत का महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंध है। ऐसे में शिपिंग रूट प्रभावित होने, कंटेनरों की सीमित उपलब्धता और माल ढुलाई महंगी होने से निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ी हैं। निर्यातकों का कहना है कि भुगतान निपटान और समय पर डिलीवरी भी चुनौती बनती जा रही है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के अनुमान के मुताबिक, मार्च महीने में मर्चेंडाइज निर्यात में 7 से 10 प्रतिशत तक गिरावट देखी जा सकती है। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी वस्तु निर्यात में 2 से 3 प्रतिशत की हल्की गिरावट का अनुमान जताया गया है।

हालांकि, सेवा निर्यात के बेहतर प्रदर्शन के चलते कुल निर्यात में सीमित वृद्धि संभव मानी जा रही है। आधिकारिक आंकड़े भी संकेत देते हैं कि निर्यात वृद्धि की रफ्तार धीमी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीनों में कुल निर्यात करीब 790 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के मुकाबले कुछ कम है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक परिस्थितियों का असर भारतीय निर्यात पर पड़ा है, हालांकि स्थिति अभी व्यापक संकट जैसी नहीं है।

इसी बीच, कुछ उद्योगों ने श्रमिकों की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई है। त्योहारों के दौरान गांव लौटे कई मजदूरों के समय पर वापस न आने से उत्पादन प्रभावित हुआ है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या अधिकतर मौसमी और क्षेत्र विशेष तक सीमित हो सकती है, न कि पूरे देश में व्यापक श्रमिक संकट का संकेत।इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में औद्योगिक एलपीजी की आपूर्ति को लेकर भी दिक्कतें सामने आई हैं, जिससे उत्पादन लागत और बढ़ी है। निर्यातकों का कहना है कि यदि ये बाधाएं लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो प्रतिस्पर्धात्मकता पर असर पड़ सकता है।

फिलहाल, उद्योग जगत को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में हालात स्थिर होने और वैश्विक सप्लाई चेन सामान्य होने पर स्थिति में सुधार आएगा। तब तक, लागत और लॉजिस्टिक्स का दबाव मैन्युफैक्चरिंग निर्यात क्षेत्र के लिए चुनौती बना रह सकता है।

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