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पाऊं गाँव में भागवत कथा का आठवां दिन:पं. सुरेन्द्र शास्त्री ने सुनाए सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष प्रसंग

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राम जानकी मार्ग स्थित पाऊं गाँव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिन कथावाचक पं. सुरेन्द्र शास्त्री ने सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष और सामंतक मणि के दिव्य प्रसंगों का वर्णन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए। वशिष्ठ नगर से पधारे पं. सुरेन्द्र शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की त्रिवेणी है, जो मानव जीवन को आध्यात्मिक आलोक से भर देती है। उन्होंने बताया कि इसके श्रवण मात्र से ही जीव को भक्ति और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसे पावन अनुष्ठानों का सौभाग्य तभी मिलता है, जब जन्म-जन्मांतर के पुण्य जागृत होते हैं। सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए शास्त्री जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की कथा सच्ची मित्रता और निष्काम भक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने बताया कि निर्धन ब्राह्मण सुदामा का अपने मित्र कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम और विनम्रता यह सिखाती है कि ईश्वर भाव के भूखे होते हैं, बाहरी वैभव के नहीं। सुदामा के दरिद्र जीवन में भी संतोष और श्रद्धा थी, जिसने उन्हें भगवान की असीम कृपा का पात्र बनाया। परीक्षित मोक्ष प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित ने मृत्यु को समीप जानकर सांसारिक मोह का त्याग कर भगवान की कथा का आश्रय लिया। सात दिनों तक श्रीमद्भागवत का श्रवण कर उन्होंने जीवन के परम सत्य को समझा और मोक्ष को प्राप्त हुए। यह प्रसंग जीवन की अनित्यता और सत्संग की महिमा को उजागर करता है। इस अवसर पर मुख्य यजमान राजेन्द्र प्रसाद दूबे, कथा प्रवक्ता शिव मंगल दूबे वैदिक, कृपा शंकर शुक्ल, जटा शंकर शुक्ल, स्वामी नारायण द्विवेदी, शिव शंकर शुक्ल, काशी नाथ द्विवेदी, विद्यासागर दूबे, भगवान देव तिवारी, दुर्गा प्रसाद शुक्ल, श्याम सुन्दर द्विवेदी, भागवत दूबे, पवन दूबे, हिमाचल दूबे, मनोज दूबे, अंगनू प्रसाद, पंकज सोनी, राम अशीष, अंकित दूबे, राघवेन्द्र शुक्ल, शोभित दूबे और दिनेश शुक्ल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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