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मुंबई में गैस सिलेंडर की किल्लत, कंस्ट्रक्शन साइटों पर ईंट-पेवर ब्लॉक से बने चूल्हे पर मजदूर खाने पकाने को हैं मजबूर

Mumbai News: गैस सिलेंडर की किल्लत का असर निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। गैस उपलब्ध न होने के कारण कई मजदूर अब ईंट और पेवर ब्लॉक से अस्थायी चूल्हा बनाकर लकड़ी की मदद से खाना बनाने को मजबूर हैं।

मुंबई: गैस सिलेंडर की किल्लत का असर निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। गैस उपलब्ध न होने के कारण कई मजदूर अब ईंट और पेवर ब्लॉक से अस्थायी चूल्हा बनाकर लकड़ी की मदद से खाना बनाने को मजबूर हैं। दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद शाम को भोजन पकाना भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। आलम यह है कि निर्माण स्थलों के पास बने अस्थाई टीन शेड में रहने वाले ये मजदूर शाम होते ही खाना बनाने की तैयारी में जुट जाते हैं। इन चूल्हों पर लकड़ी जलाकर दाल-सब्जी और चावल पकाए जा रहे हैं।

चूल्हा जलाने में भी काफी समय लगता है:

नालासोपारा के एक निर्माण स्थल पर काम करने वाले 35 वर्षीय मजदूर रामबाबू यादव बताते हैं कि पहले वे गैस सिलिंडर पर आसानी से खाना बना लेते थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से सिलिंडर मिलना मुश्किल हो गया है। रामबाबू ने बताया कि दिनभर काम के बाद जल्दी खाना बनाकर आराम करना चाहते हैं, लेकिन अब लकड़ी जुटानी पड़ती है और चूल्हा जलाने में भी काफी समय लगता है। वहीं, बिहार के मधुबनी से आए मजदूर मुकेश पासवान ने भी ईंट और पेवर ब्लॉक से अस्थायी चूल्हा बना लिया है। मुकेश ने बताया कि साइट पर पड़े पैकिंग के पुराने बॉक्स, लकड़ी, फट्टा इत्यादि को इकट्ठा कर उन्हें खाना बनाना पड़ता है। गैस नहीं मिलने से दिक्कत तो है, लेकिन पेट भरने के लिए यही रास्ता बचा है।

मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे जलाते हैं:

एक और मजदूर संतोष साहनी बताते हैं कि लकड़ी के चूल्हे की आदत नहीं है। इसलिए इस चूल्हे से निकलने वाले धुएं के कारण आंखों में जलन और सांस लेने में भी परेशानी होती है। साहनी के अनुसार, गैस चूल्हे पर खाना बनाना आसान था, लेकिन अब मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे पर ही खाना पकाना पड़ रहा है। निर्माण स्थलों पर रहने वाले कई मजदूरों ने बताया कि अगर जल्द ही गैस सिलिंडर की उपलब्धता सामान्य नहीं हुई तो उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। लेकिन, मेहनत-मजदूरी करने वाले इन मजदूरों द्वारा ईंटों से बने अस्थाई चूल्हों पर ही खाना बनाकर भूख मिटना और अपना गुजारा करना इनकी मजबूरी हैं।

घरेलू सिलिंडर नहीं मिल रहा

साइट सुपरवाइजर पंकज ठाकुर ने बताया कि घरेलू सिलिंडर नहीं मिल रहा है। इसलिए मजदूरों को दिक्कतें हो रही हैं। उम्मीद करते हैं जल्दी ही धुएं से इन्हें निजात मिल जाएग़ी। ठाकुर ने बताया कि सिलिंडर की दिक्कत के कारण कई मजदूर पलायन भी कर रहे हैं।

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