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प्रधानमंत्री मोदी ने ‘जनआक्रोश महिला सम्मेलन’ में आधी आबादी को साधा, विपक्ष को किया बेनकाब

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र काशी से देश की आधी आबादी (महिलाओं ) को साधने के लिए नारी वंदन संशोधन विधेयक पर विपक्ष को घेरा। उन्होंने विधेयक के बहाने विपक्ष को बेनकाब करते हुए संदेश दिया कि भारत की नारी नेतृत्व करने में पूरी तरह सक्षम है।

बरेका में आयोजित ‘जनआक्रोश महिला सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में विपक्षी दलों के सामने चुनौती पेश कर कहा कि एक नए युग की शुरुआत के लिए माताओं-बहनों का आशीर्वाद लेने काशी आए हैं। साथ ही उन्होंने महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ाते हुए महिला आरक्षण को लागू करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

प्रधानमंत्री ने अपने गुजरात के मुख्यमंत्री काल के समय का उल्लेख कर कहा कि वह करीब 25 वर्ष पहले गुजरात के मुख्यमंत्री बने, बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने विशेष योजनाएं शुरू कीं, जिससे अधिक से अधिक लड़कियां स्कूल पहुंच सकें।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जब देश की माताओं-बहनों ने उन्हें सेवा का अवसर दिया, तब से भारत तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने जनसभा में हमेशा की तरह “हर-हर महादेव” के उद्घोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की।

उन्होंने काशी की आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नगरी माता श्रृंगार गौरी, माता अन्नपूर्णा, माता विशालाक्षी, माता संकट मोचन की शक्ति और मां गंगा की पावन धारा से समृद्ध है। इस पवित्र भूमि पर बहनों का यह विशाल समागम कार्यक्रम को और अधिक दिव्य बना रहा है।

उन्होंने कहा कि आज मैं इस कार्यक्रम में महा यज्ञ के प्रारंभ के लिए आप सभी बहनों और बेटियों का आशीर्वाद लेने आया हूं। काशी के सांसद के रूप में, देश के प्रधानमंत्री के रूप में, मुझे देश के कल्याण के एक महत्वपूर्ण लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आपके आशीर्वाद की आवश्यकता है।

जनसभा के मंच पर जाने के पहले प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में आई महिलाओं को बैठने के बनाए गए सभी सेक्टर में स्वयं जाकर महिलाओं का अभिवादन किया। इससे महिलाएं भी प्रभावित दिखी। प्रधानमंत्री के इस संवेदनशील व्यवहार पर महिलाओं ने कहा कि इस सम्मेलन से यह संदेश साफ है कि महिलायें हर जिम्मेदारी का निर्वहन करने में सक्षम है।

आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी योग्यता का लोहा मनवा चुकी हैं। चाहे वह प्रशासनिक सेवाएं हों, सशस्त्र बल हों, कॉरपोरेट जगत हो या लेखन और शिक्षा का क्षेत्र। लेकिन राजनीति में उनकी उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही है। इस कानून के लागू होने के बाद संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी।

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