रिपोर्ट:हेमन्त कुमार दुबे।
निचलौल।शासन और प्रशासन के सख्त निर्देशों के बावजूद निचलौल स्थित भारत गैस एजेंसी पर भ्रष्टाचार और कालाबाजारी ने अपनी जड़ें गहरी जमा ली हैं। एक तरफ आम उपभोक्ता गैस के लिए लंबी कतारों में लगकर अपनी बारी का इंतजार कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ एजेंसी के गोदाम से दिन-दहाड़े पिकअप गाड़ियों में भरकर दर्जनों सिलेंडर ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं।

होम डिलीवरी बंद, फिर पिकअप से कहाँ जा रहे हैं सिलेंडर।
सूत्रों और स्थानीय उपभोक्ताओं के अनुसार, एजेंसी ने कागजों पर होम डिलीवरी को पूरी तरह प्रतिबंधित कर रखा है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। दमकी स्थित गोदाम से दूर ले जाकर सिलेंडरों की खुलेआम सौदेबाजी हो रही है। जानकारी के अनुसार, जो सिलेंडर निर्धारित मूल्य पर मिलना चाहिए, उसे कालाबाजारी के जरिए 1200 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक में बेचा जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जब होम डिलीवरी बंद है, तो सैकड़ों सिलेंडर पिकअप में लादकर कहाँ खपाए जा रहे हैं?
जटिल प्रक्रिया और बंद दफ्तर से उपभोक्ता बेहाल।*
एजेंसी ने गैस बुकिंग की प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया है कि उपभोक्ताओं को कई-कई दिनों तक कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।एक पीड़ित उपभोक्ता ने बताया कि वह पिछले एक महीने से सिर्फ मोबाइल नंबर बदलवाने के लिए भटक रहा है, लेकिन उसका काम नहीं हुआ।निचलौल स्थित एजेंसी का कार्यालय अधिकांश समय बंद रहता है। वहीं, एजेंसी के मुख्य कर्ता-धर्ता *प्रदीप निगम* का मोबाइल फोन अक्सर बंद आता है, जिससे उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज कराने या समस्या का समाधान पाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
जांच के घेरे में एजेंसी, फिर भी हौसले बुलंद
उल्लेखनीय है कि इस गैस एजेंसी में कुछ समय पूर्व हुई विभागीय जांच में भारी अनियमितताएं और खामियां पाई गई थीं। उस जांच की कार्रवाई अभी भी प्रक्रियाधीन है, लेकिन इसके बावजूद प्रबंधन के हौसले इतने बुलंद हैं कि कालाबाजारी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है।
आक्रोशित उपभोक्ता खोलने वाले हैं मोर्चा
क्षेत्र के दर्जनों उपभोक्ता अब इस भ्रष्टाचार के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि वे साक्ष्यों के साथ कालाबाजारी की पोल खोलने के लिए तैयार हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर मामले पर क्या संज्ञान लेता है या फिर उपभोक्ताओं को इसी तरह ठगा जाता रहेगा।












