भाेपाल। राज्यसभा चुनाव के बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से दो बार कांग्रेस प्रत्याशी रहे वरिष्ठ नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
वहीं बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के मुख्यमंत्री निवास पहुंचने से राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। इन घटनाक्रमों ने राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की रणनीति और संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नरेश ज्ञानचंदानी ने साेमवार काे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को भेजे अपने इस्तीफा पत्र में 37 वर्षों की राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी हित को सर्वोपरि रखा और कभी किसी पद या टिकट की मांग नहीं की। उन्होंने लिखा कि केवल राहुल गांधी तक अपनी बात पहुंचाने के लिए किए गए एक ट्वीट को लेकर जिस तरह की प्रतिक्रिया मिली, उससे वे आहत हैं और इसी कारण पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है।
राज्यसभा उम्मीदवार चयन से थी नाराजगी
ज्ञानचंदानी का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक मुकाबला चरम पर है। दरअसल, कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति जताई थी। उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को टैग करते हुए लिखा था कि 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए ऐसे नेता को राज्यसभा भेजा जाना चाहिए जिसकी प्रदेश में मजबूत राजनीतिक पकड़ हो और जो संगठन को चुनावी बढ़त दिला सके। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को सबसे उपयुक्त विकल्प बताया था। इस पोस्ट के बाद पार्टी में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चर्चा भी शुरू हो गई थी।
मोतीलाल वोरा से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर
अपने इस्तीफा पत्र में ज्ञानचंदानी ने कहा कि वर्ष 1989 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय मोतीलाल वोरा उन्हें राजनीति में लेकर आए थे। बाद में उन्हें दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ काम करने का अवसर मिला। उन्होंने दावा किया कि 2018 के विधानसभा चुनाव में उनके उम्मीदवार बनने से सिंधी समाज का बड़ा वर्ग कांग्रेस के साथ जुड़ा, जिसका लाभ पार्टी को कई सीटों पर मिला।
निर्मला सप्रे के सीएम हाउस पहुंचने से बढ़ी अटकलें
इधर, बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के मुख्यमंत्री निवास पहुंचने से राजनीतिक सरगर्मियां और तेज हो गई हैं। भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद उनका सीएम हाउस पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है। गौरतलब है कि निर्मला सप्रे पहले भी कई बार भाजपा के कार्यक्रमों और मंचों पर नजर आ चुकी हैं। कांग्रेस उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर कानूनी लड़ाई भी लड़ रही है, जिसका मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है।
चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए बढ़ी चुनौती
राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले सामने आए इन घटनाक्रमों ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने और क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं को रोकने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी और विधायकों की गतिविधियां विपक्ष को कांग्रेस पर हमले का मौका दे रही हैं। राज्यसभा की तीसरी सीट पर मुकाबला पहले ही रोचक हो चुका है। ऐसे में नरेश ज्ञानचंदानी का इस्तीफा और निर्मला सप्रे की सक्रियता चुनावी समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे रही है।












