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निजी स्कूलों पर किताब-ड्रेस खरीद को लेकर दबाव के आरोप, कौशाम्बी में औचक निरीक्षण; प्रबंधन ने आरोपों को बताया निराधार

IMG-20260430-WA0079कौशाम्बी। जिले में कुछ दिन पर्व विभिन्न समाचार पत्रों और अभिभावकों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर प्रशासन ने निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। आरोप था कि कुछ स्कूल प्रबंधन नए शैक्षिक सत्र 2026–27 की शुरुआत में अभिभावकों पर विद्यालय परिसर या तय दुकानों से ही पाठ्य पुस्तकें, कॉपियाँ, यूनिफॉर्म व अन्य सामग्री खरीदने का दबाव बना रहे हैं, साथ ही हर वर्ष किताबों के स्वरूप में बदलाव कर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. कमलेन्द्र कुमार कुशवाहा ने 30 अप्रैल को विकासखंड सिराथू के बिसारा स्थित सैनिक पब्लिक स्कूल और सर्वोदय जूनियर हाईस्कूल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से सीधे संवाद कर वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास किया।अभिभावकों ने बातचीत में बताया कि उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अपनी इच्छा से किताबें खरीदी हैं। उनके अनुसार, उपयोग में लाई जा रही पुस्तकें एनसीईआरटी एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानकों के अनुरूप हैं और किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया गया।वहीं, विद्यालय प्रबंधन की ओर से शपथपत्र प्रस्तुत कर स्पष्ट किया गया कि संस्थान में केवल एनसीईआरटी व एनईपी आधारित पाठ्यक्रम ही लागू है। प्रबंधन ने यह भी कहा कि किसी अभिभावक को किसी विशेष विक्रेता या प्रकाशक से सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया गया है और भविष्य में भी ऐसा नहीं होगा। साथ ही विद्यालय परिसर में किसी प्रकार की शैक्षणिक सामग्री की बिक्री से इनकार किया गया।प्रबंधन ने शिकायतों को द्वेषपूर्ण और भ्रामक बताते हुए कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा जानबूझकर संस्थान को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षण शुल्क के अतिरिक्त अभिभावकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा रहा है।प्रशासन ने संकेत दिया है कि यदि भविष्य में इस प्रकार की शिकायतें सत्य पाई जाती हैं तो संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल निरीक्षण में आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन शिक्षा विभाग ने निगरानी और जांच की प्रक्रिया जारी रखने की बात कही है।

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