एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALPA इंडिया) ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच कमर्शियल उड़ानों के लगातार ऑपरेशन को लेकर सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संघ ने चेतावनी दी है कि ऐसे फैसलों से जान का खतरा हो सकता है और सरकार को तुरंत दखल देना होगा। इसको लेकर ALPA ने डीजीसीए को पत्र लिखा है।
डीजीसीए को लिखे गए पत्र में पायलटों की संस्था ने कहा है कि एक्टिव वॉर जोन में या उसके आसपास फ्लाइट्स चलाना यात्रियों, क्रू और एयरक्राफ्ट के लिए एक गंभीर और अस्वीकार्य जोखिम पैदा करता है। ऐसे फैसलों को जानबूझकर इंसानी जान को खतरे में डालना बता गया है।
DGCA ने सुरक्षा एडवाइजरी जारी की
ALPA इंडिया ने कहा है कि इससे पहले उसने 18 मार्च को इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाया था, जिसके बाद DGCA ने 19 मार्च को एक सुरक्षा एडवाइजरी जारी करके एयरलाइनों से अपने जोखिम का आकलन करने को कहा था। हालांकि, एसोसिएशन ने इस तरीके की आलोचना की और कहा कि युद्ध क्षेत्र में जोखिम का आकलन सरकारों को करना चाहिए, न कि अलग-अलग एयरलाइनों पर छोड़ देना चाहिए।
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अपने जोखिम का आकलन करें
वैश्विक एविएशन मानदंडों का जिक्र करते हुए ALPA इंडिया ने कहा कि इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) ऑपरेटरों को अपने जोखिम का आकलन करने की इजाजत देता है लेकिन सक्रिय संघर्ष क्षेत्रों में सरकारों द्वारा केंद्रीकृत, आधिकारिक निरीक्षण और समय पर संवाद करने की जरूरत होती है।
इसमें यह भी कहा गया कि एयरलाइंस के पास युद्ध जैसे हालात में खतरों का जोखिम का आकलन करने के लिए जरूरी इंटेलिजेंस और सर्विलांस कैपेबिलिटीज की कमी है।
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यात्री जहाजों को मार गिराने का दिया हवाला
एसोसिएशन ने ऐसे रूट्स पर उड़ान भरने वाले पायलटों के लिए वॉर-रिस्क इंश्योरेंस कवरेज पर स्पष्टता की कमी पर भी चिंता जताई। इसमें कहा गया है कि क्रू मेंबर्स ने इस बात का पुष्टि मांगी है कि क्या युद्ध क्षेत्र में इंश्योरेंस वैध रहता है, लेकिन अब तक कोई फॉर्मल एश्योरेंस या डॉक्यूमेंटेशन नहीं दिया गया है, जिससे किसी घटना के मामले में देनदारी और सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
ALPA इंडिया ने आगे उन पिछली घटनाओं की ओर इशारा किया जहां युद्ध क्षोत्रों में यात्री जहाजों को मार गिराया गया था। इसमें ईरान एयर फ्लाइट 655, लीबिया अरब एयरलाइंस फ्लाइट 114, और यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस फ्लाइट 752 शामिल हैं। इन घटनाओं के जरिए संघ ने जान के जोखिम को लेकर चिंता जताई है।










