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नवजात की मौत पर जनता सेवा हॉस्पिटल पर FIR:बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के ऑपरेशन का आरोप, प्रसूता की हालत गंभीर


सिद्धार्थनगर के इटवा कस्बे स्थित एक निजी अस्पताल में कथित चिकित्सीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन पर बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ के ऑपरेशन करने का आरोप लगा है। इटवा पुलिस ने पीड़िता के पति की तहरीर पर अस्पताल संचालक और स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने भी मामले की जांच के लिए समिति गठित की है। घटना 23 मई 2026 की बताई जा रही है। थाना इटवा क्षेत्र के ग्राम सहदेड्या निवासी चंद्रमणी के अनुसार उनकी पत्नी वंदना को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। हालत गंभीर होने पर वह रात करीब 11 बजे उन्हें लेकर इटवा स्थित जनता सेवा हॉस्पिटल पहुंचे। आरोप है कि अस्पताल कर्मियों ने सुरक्षित प्रसव और महिला डॉक्टर की उपलब्धता का भरोसा देकर भर्ती कर लिया। पीड़ित पति का आरोप है कि अस्पताल में बिना किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की मौजूदगी के ऑपरेशन कर प्रसव कराया गया। प्रसव से पहले न तो समुचित जांच की गई और न ही प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ, सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ या बाल रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। परिजनों के मुताबिक ऑपरेशन के बाद जन्मे नवजात की सही तरीके से देखभाल नहीं की गई, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। वहीं प्रसूता वंदना की हालत भी गंभीर बनी हुई है। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मामले की जानकारी मिलने पर इटवा पुलिस ने चंद्रमणी की तहरीर के आधार पर अस्पताल संचालक और संबंधित स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस अस्पताल के दस्तावेज, ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों और प्रसव प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। उधर, मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। गठित समिति में डॉ. आर.जी. सिंह (अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरसीएच), डॉ. आशीष कुमार अग्रहरी (उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी) और डॉ. संदीप कुमार द्विवेदी (अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटवा) को शामिल किया गया है। जांच टीम अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं, चिकित्सकीय मानकों, ऑपरेशन प्रक्रिया और ड्यूटी पर तैनात मेडिकल स्टाफ की भूमिका की समीक्षा करेगी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जिले में निजी अस्पतालों की व्यापक जांच कराने और मानकों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग दोनों स्तरों पर जांच जारी है।

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