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अमोढ़ा क्षेत्र के प्रसिद्ध झारखंडी मंदिर में इन दिनों आस्था का उजाला तो है, लेकिन शाम ढलते ही परिसर घने अंधेरे में डूब जाता है। मंदिर में वर्षों पहले लगाई गई सोलर लाइट लंबे समय से खराब पड़ी है और अब महज शोपीस बनकर रह गई है। प्रकाश की समुचित व्यवस्था नहीं होने से मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंदिर परिसर में लगी सोलर लाइट काफी समय से निष्क्रिय है। बताया जा रहा है कि उसकी बैटरी भी मौके पर मौजूद नहीं है। ऐसे में लाखों रुपये की लागत से लगाई गई यह व्यवस्था अब श्रद्धालुओं के लिए रोशनी देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है। सावन में बढ़ी श्रद्धालुओं की मुश्किल सावन माह में झारखंडी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो जाती है। शाम के समय भी बड़ी संख्या में भक्त पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। लेकिन सूर्यास्त के बाद परिसर में अंधेरा गहराने से श्रद्धालुओं को रास्ते और परिसर में आवाजाही करने में दिक्कत होती है। वैकल्पिक प्रकाश व्यवस्था भी नहीं मंदिर में रात के समय प्रकाश के लिए कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अंधेरे में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष परेशानी उठानी पड़ती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि सावन जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक महीने में मंदिर परिसर को रोशन रखना प्राथमिकता होनी चाहिए। पुजारी बोले- लंबे समय से खराब है लाइट झारखंडी मंदिर शिवालय के पुजारी परमात्मा गोसाई ने बताया कि मंदिर परिसर में लगाई गई सोलर लाइट काफी समय से खराब पड़ी है। इसकी बैटरी भी नहीं है। रात में प्रकाश के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से पूरे परिसर में अंधेरा छा जाता है। प्रशासन से व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग अमोढ़ा क्षेत्र का यह प्रमुख धार्मिक स्थल दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। सावन में यहां भक्तों की संख्या और बढ़ जाती है। ऐसे में श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रबंधन और प्रशासन से खराब सोलर लाइट को तत्काल दुरुस्त कराने अथवा स्थायी प्रकाश व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि आस्था के इस केंद्र में रात के समय भी रोशनी बनी रहे।
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सावन में झारखंडी मंदिर पर अंधेरे का साया:बस्ती में खराब पड़ी सोलर लाइट बनी शोपीस, वर्षों से बंद पड़ी है प्रकाश व्यवस्था
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